जमशेदपुर: जेपीएससी और जेएसएसी परीक्षाओं में कथित धांधली तथा छात्रों पर हुए हमले के विरोध में आजसू छात्र संघ ने आंदोलन का ऐलान किया है। संगठन की ओर से जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर छात्रों के प्रस्तावित शांतिपूर्ण आंदोलन के लिए अनुमति मांगी गई है। संघ ने आरोप लगाया है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं के खिलाफ छात्र लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठा रहे हैं, लेकिन उनकी आवाज को दबाने का प्रयास किया जा रहा है।
छात्रों पर हमले को लेकर आजसू छात्र संघ ने जताया विरोध
झारखंड सरकार के पूर्व मंत्री एवं आजसू नेता रामचंद्र सहिस ने कहा कि हाल ही में छात्रों द्वारा सरकार के खिलाफ प्रतीकात्मक पुतला दहन किए जाने के दौरान कुछ असामाजिक तत्वों ने छात्रों पर हमला किया। इस घटना में कई छात्रों के घायल होने का दावा किया गया है।आजसू छात्र संघ ने घटना की कड़ी निंदा करते हुए हमले में शामिल लोगों के खिलाफ तत्काल प्राथमिकी दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की मांग की है। संगठन का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में छात्रों को अपनी मांगों और समस्याओं को लेकर शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन करने का संवैधानिक अधिकार है।
जिला प्रशासन से आंदोलन की अनुमति देने की मांग
आजसू छात्र संघ की ओर से सौंपे गए ज्ञापन में मांग की गई है कि छात्रों पर हमला करने वालों के खिलाफ अविलंब एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में प्रस्तावित कार्यक्रमों के लिए प्रशासन विधिवत अनुमति प्रदान करे।संगठन ने प्रशासन से अपील की है कि छात्रों के शांतिपूर्ण आंदोलन में किसी तरह की बाधा न डाली जाए और उनकी समस्याओं का समाधान करने की दिशा में आवश्यक कदम उठाए जाएं।
2 सितंबर को साकची से निकलेगा पैदल मार्च
आजसू छात्र संघ ने घोषणा की है कि 2 सितंबर को शाम 5 बजे साकची आमबागान से पैदल मार्च निकाला जाएगा। प्रस्तावित मार्च साकची गोलचक्कर तक पहुंचेगा, जहां सरकार के खिलाफ प्रतीकात्मक पुतला दहन किया जाएगा।इसके बाद छात्र मार्च करते हुए उपायुक्त कार्यालय पहुंचेंगे और अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपेंगे। संगठन ने इसे छात्रों के अधिकारों और उनके भविष्य की रक्षा के लिए किया जा रहा लोकतांत्रिक आंदोलन बताया है।
मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन होगा व्यापक
आजसू छात्र संघ के नेताओं ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और छात्रों के साथ हुई घटनाओं को लेकर सरकार और प्रशासन को गंभीरता से कार्रवाई करनी चाहिए। नेताओं ने कहा कि छात्रों की आवाज दबाने के बजाय उनकी समस्याओं का समाधान किया जाना चाहिए।संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को आगे और व्यापक रूप दिया जाएगा।
