जमशेदपुर: शहर में संचालित कुछ निजी सुरक्षा एजेंसियों पर सुरक्षा गार्डों के शोषण और श्रम कानूनों के उल्लंघन के आरोप लगाए गए हैं। इस संबंध में जिला श्रम पदाधिकारी (डीएलसी), जिला प्रशासन और संबंधित विभागों से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने वाली एजेंसियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है।
8 घंटे के वेतन पर 12 घंटे ड्यूटी कराने का आरोप
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कुछ निजी सुरक्षा एजेंसियों द्वारा सुरक्षा गार्डों से निर्धारित कार्य अवधि से अधिक समय तक काम कराया जा रहा है। कई जगहों पर गार्डों से 8 घंटे की ड्यूटी के निर्धारित वेतन पर 12 घंटे तक काम कराने की बात कही गई है।शिकायतकर्ताओं का कहना है कि आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि से आने वाले कई सुरक्षा गार्ड नौकरी जाने के डर से अतिरिक्त कार्य का विरोध नहीं कर पाते हैं। कुछ मामलों में विरोध करने पर नौकरी से हटाने की धमकी दिए जाने का भी आरोप लगाया गया है।
पीएफ, ईएसआइ और बोनस नहीं देने की शिकायत
शिकायत में कुछ एजेंसियों पर कर्मचारियों को भविष्य निधि, कर्मचारी राज्य बीमा, बोनस और अन्य वैधानिक सुविधाओं से वंचित रखने के आरोप भी लगाए गए हैं। इसके अलावा कुछ एजेंसियों के गैर-लाइसेंसी होने अथवा निर्धारित नियमों का पालन नहीं करने की शिकायत भी सामने आई है।
पर्याप्त प्रशिक्षण नहीं देने का भी आरोप
शिकायतकर्ताओं के मुताबिक, कुछ सुरक्षा एजेंसियां गार्डों को उनके काम के अनुरूप पर्याप्त प्रशिक्षण भी नहीं देती हैं। सुरक्षा क्षेत्र में तैनात कर्मचारियों से निर्धारित मानकों के अनुरूप कार्य कराने और उन्हें आवश्यक प्रशिक्षण उपलब्ध कराने की मांग की गई है।
श्रम विभाग से निष्पक्ष जांच की मांग
मामले को श्रमिक हित और जनहित से जुड़ा बताते हुए जिला श्रम पदाधिकारी, जिला प्रशासन और संबंधित विभागों से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई है। शिकायतकर्ताओं ने कहा है कि जांच के दौरान यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित एजेंसियों के खिलाफ नियमों के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
सुरक्षा गार्डों को वैधानिक अधिकार देने पर जोर
शिकायत में सुरक्षा गार्डों को निर्धारित कार्य अवधि के अनुसार ड्यूटी, वैधानिक सुविधाएं और नियमों के अनुरूप पारिश्रमिक सुनिश्चित कराने की मांग की गई है। साथ ही निजी सुरक्षा एजेंसियों के कामकाज की नियमित निगरानी और श्रम कानूनों के पालन को सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया है।शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इस मुद्दे का उद्देश्य किसी राजनीतिक विवाद को जन्म देना नहीं, बल्कि निजी सुरक्षा क्षेत्र में काम कर रहे कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा करना है। उन्होंने प्रशासन से मामले को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक कार्रवाई की उम्मीद जताई है।
