जमशेदपुर: आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) और भीम आर्मी की ओर से गुरुवार को “संपूर्ण भागीदारी आंदोलन” के तहत पूर्वी सिंहभूम जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन किया गया। कार्यकर्ताओं ने विभिन्न मांगों को लेकर आवाज उठाई और उपायुक्त के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। यह प्रदर्शन संगठन की ओर से देशव्यापी आंदोलन के तहत आयोजित किया गया था।
एससी, एसटी और ओबीसी को उचित भागीदारी की मांग
प्रदर्शन के बाद संगठन के प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति के नाम मांग पत्र सौंपा। इसमें अनुसूचित जाति , अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, महिलाओं और अन्य वंचित समुदायों को सामाजिक, शैक्षणिक और प्रशासनिक क्षेत्रों में उचित भागीदारी सुनिश्चित करने की मांग की गई।संगठन ने कहा कि शिक्षा, रोजगार, राजनीति, न्यायपालिका और नीति निर्धारण की प्रक्रियाओं में वंचित वर्गों की भागीदारी बढ़ाने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए।
महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण की मांग
ज्ञापन में महिला आरक्षण के तहत महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण लागू करने की मांग रखी गई। साथ ही दलित, आदिवासी और पिछड़े वर्ग की महिलाओं के लिए आरक्षण में “कोटे के अंदर कोटा” की व्यवस्था करने की मांग भी उठाई गई।इसके अलावा आरक्षित वर्गों के रिक्त पदों और बैकलॉग पदों को जल्द भरने की मांग की गई।
जाति आधारित जनगणना में ओबीसी के लिए अलग कॉलम
संगठन ने जाति आधारित जनगणना में ओबीसी के लिए अलग कॉलम शामिल करने की मांग भी रखी। ज्ञापन में वास्तविक जनसंख्या का पारदर्शी आकलन करने और उसके आधार पर सामाजिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की बात कही गई।
उच्च न्यायपालिका में प्रतिनिधित्व बढ़ाने की मांग
आजाद समाज पार्टी और भीम आर्मी ने उच्च न्यायपालिका में एससी, एसटी और ओबीसी वर्गों की भागीदारी बढ़ाने की मांग की। इसके लिए संगठन ने कॉलेजियम व्यवस्था के स्थान पर उच्च न्यायिक आयोग के गठन की मांग रखी।इसके अलावा निजी क्षेत्र में आरक्षण लागू करने और समूह ‘क’ की भर्तियों में लेटरल एंट्री व्यवस्था समाप्त करने की मांग भी ज्ञापन में शामिल रही। संगठन ने संविदा और आउटसोर्सिंग के बजाय स्थायी नियुक्तियों को प्राथमिकता देने की बात कही।
सफाईकर्मियों की स्थायी नियुक्ति और सुरक्षा की मांग
ज्ञापन में सफाईकर्मियों की आउटसोर्सिंग व्यवस्था समाप्त कर उन्हें स्थायी करने की मांग की गई। साथ ही सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान मानव प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग उठाई गई।संगठन ने कहा कि सफाई के दौरान दुर्घटना में किसी कर्मचारी की मौत होने पर पीड़ित परिवार को 30 लाख रुपये मुआवजा और सरकारी नौकरी दी जानी चाहिए।
छात्रवृत्ति और छात्रावासों को लेकर भी मांग
प्रदर्शनकारियों ने छात्रवृत्तियों का नियमित भुगतान सुनिश्चित करने और नए छात्रावासों के निर्माण की मांग भी की। शिक्षा के क्षेत्र में समान अवसर से जुड़े प्रावधानों को प्रभावी तरीके से लागू करने पर भी जोर दिया गया।
2 अप्रैल 2018 के मामलों को वापस लेने की मांग
पार्टी के जिला अध्यक्ष बिकश हेम्ब्रम और अन्य पदाधिकारियों ने कहा कि संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार और अवसर प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि वंचित वर्गों को शिक्षा, रोजगार, राजनीति, न्यायपालिका और नीति निर्धारण में उचित प्रतिनिधित्व मिलने तक आंदोलन जारी रहेगा।पदाधिकारियों ने 2 अप्रैल 2018 के आंदोलन के दौरान दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग भी दोहराई।
