शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्त करने की मांग, एटक ने की ‘वन नेशन-वन एजुकेशन’ की वकालत

जमशेदपुर: ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (एटक) की ओर से रविवार को बंगाल क्लब के कॉन्फ्रेंस हॉल में शिक्षकों और एटक पदाधिकारियों की बैठक आयोजित की गई। बैठक में शिक्षकों ने अपने कार्यकाल के दौरान सामने आने वाली विभिन्न समस्याओं को रखा। शिक्षकों ने कहा कि पढ़ाई के अलावा उन्हें जनगणना, पशुगणना, चुनाव कार्य, एसआईआर समेत कई सरकारी कार्यों में लगाया जाता है, जिससे शिक्षण व्यवस्था प्रभावित हो रही है।शिक्षकों का कहना था कि गैर-शैक्षणिक कार्यों का बढ़ता बोझ विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए मिलने वाले समय को कम कर रहा है। इसका असर सरकारी विद्यालयों की शिक्षा व्यवस्था और अभिभावकों के भरोसे पर भी पड़ रहा है।

गैर-शैक्षणिक कार्यों के कारण प्रभावित हो रही पढ़ाई

बैठक में शिक्षकों ने कहा कि सरकारी स्कूलों में योग्य शिक्षकों की कमी नहीं है, लेकिन उन्हें लगातार अतिरिक्त सरकारी कार्यों में लगाए जाने से वे अपनी पूरी क्षमता के साथ शिक्षण कार्य नहीं कर पा रहे हैं।वक्ताओं के अनुसार, शिक्षकों पर बढ़ते गैर-शैक्षणिक कार्यों का असर सीधे विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि यदि शिक्षकों को केवल शिक्षण कार्य के लिए उपलब्ध कराया जाए तो सरकारी विद्यालयों की शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार किया जा सकता है।

धनंजय शुक्ला ने की ‘वन नेशन-वन एजुकेशन’ की वकालत

बैठक का संचालन कर रहे एटक के उपाध्यक्ष धनंजय शुक्ला ने ‘वन नेशन-वन इलेक्शन’ की तर्ज पर ‘वन नेशन-वन एजुकेशन’ की वकालत की।उन्होंने कहा कि देश में एक समान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा व्यवस्था लागू होनी चाहिए। शिक्षकों को शिक्षा के अलावा अन्य कार्यों से मुक्त करने पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि इससे शिक्षकों को विद्यार्थियों के शिक्षण पर अधिक समय देने का अवसर मिलेगा।

शिक्षकों से करीब 79 प्रकार के अतिरिक्त कार्य कराने का दावा

एटक के राज्य सचिव अंबुज कुमार ठाकुर ने कहा कि शिक्षकों से लगभग 79 प्रकार के अतिरिक्त कार्य कराए जा रहे हैं। उनके अनुसार, इससे शिक्षकों पर अत्यधिक दबाव बढ़ रहा है।उन्होंने मांग की कि शिक्षकों को केवल शिक्षण कार्य तक सीमित रखा जाए। साथ ही सरकारी विद्यालयों की व्यवस्था को निजी स्कूलों की तर्ज पर आधुनिक और सुविधायुक्त बनाने की दिशा में काम किया जाए, ताकि लोगों का सरकारी शिक्षा व्यवस्था में भरोसा मजबूत हो सके।

पूर्व शिक्षक ने प्रशासनिक दबाव का मुद्दा उठाया

पूर्व शिक्षक राय शशि भूषण शर्मा ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि शिक्षकों पर प्रशासनिक दबाव लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने शिक्षकों से एकजुट होकर अपनी समस्याओं के समाधान के लिए आवाज उठाने का आह्वान किया।उन्होंने अभिभावकों से भी सरकारी शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए आगे आने की अपील की।बैठक में शिक्षक सरोज कुमार रजक, बालचंद्र प्रजापति, भीम प्रसाद शर्मा और लखी चरण सिंह ने भी शिक्षकों की समस्याओं और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर अपने विचार रखे।

एटक शिक्षक सेल का गठन

बैठक के अंत में एटक शिक्षक सेल का गठन किया गया। संगठन में धनंजय शुक्ला और हीरा अरकने को संरक्षक, राय शशि भूषण शर्मा को अध्यक्ष, आलोक मिश्रा को सचिव तथा बालचंद्र प्रजापति को कोषाध्यक्ष बनाया गया।

कई प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित

बैठक में शिक्षकों और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े कई प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किए गए। इनमें प्रमुख रूप से ‘वन नेशन-वन एजुकेशन’ लागू करने की मांग,शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्त करना,सरकारी शिक्षा के स्तर में सुधार,विद्यालय भवनों का आधुनिकीकरण,स्थायी शिक्षकों की नियुक्ति और अस्थायी शिक्षकों के लिए ‘समान कार्य के लिए समान वेतन’ का सिद्धांत लागू करना। शिक्षकों ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए शिक्षकों को पर्याप्त समय और बेहतर संसाधन उपलब्ध कराना जरूरी है।

बड़ी संख्या में शिक्षक और एटक पदाधिकारी रहे मौजूद

इस अवसर पर एटक के उप महासचिव हीरा अरकने, लेबर सेल के सचिव गिरीश कुमार सिंह, जफर खान, संतोष कुमार, मो. हुसैन सहित बड़ी संख्या में शिक्षक और संगठन के पदाधिकारी मौजूद रहे।

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