जमशेदपुर: पूर्वी सिंहभूम जिले में शिक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। सरकार द्वारा 42 मिडिल स्कूलों को उच्च विद्यालय में अपग्रेड करने के बावजूद अधिकांश स्कूलों में पढ़ाई अब तक सुचारू रूप से शुरू नहीं हो पाई है।
जमीनी हकीकत चिंताजनक
जानकारी के अनुसार, करीब 80% अपग्रेडेड स्कूलों में गणित, विज्ञान और अंग्रेजी जैसे विषयों के शिक्षक नियुक्त नहीं हैं। ऐसे में छात्र बिना पढ़ाई के ही स्कूल आने को मजबूर हैं, जिससे उनकी शिक्षा पर गहरा असर पड़ रहा है।
बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव
कई स्कूलों में भवन निर्माण अधूरा है। बेंच-डेस्क, ब्लैकबोर्ड, बिजली, पानी और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं। लैब और लाइब्रेरी बंद पड़े हैं, जिससे छात्रों को व्यावहारिक शिक्षा से भी वंचित रहना पड़ रहा है।
इंटर में नामांकन का संकट
झारखंड एकेडमिक काउंसिल के 2026 मैट्रिक परीक्षा में जिले से 20,726 छात्र पास हुए, जिनमें करीब 8,000 छात्र केवल जमशेदपुर शहर से हैं। इसके बावजूद पूरे जिले में सरकारी प्लस टू स्कूलों की संख्या घटकर मात्र 3 रह गई है, जिनकी कुल क्षमता लगभग 1,500 छात्रों की है।पहले जिले के 10 सरकारी संस्थानों में इंटर की पढ़ाई होती थी, जहां करीब 10,000 छात्रों का नामांकन संभव था। कॉलेजों में इंटर की पढ़ाई बंद होने के बाद यह संख्या तेजी से घट गई है।
निजी स्कूलों का बढ़ता दबाव
सरकारी व्यवस्था कमजोर होने का सीधा असर छात्रों और अभिभावकों पर पड़ रहा है। अनुमान है कि करीब 5,500 छात्रों को मजबूरी में निजी स्कूलों में दाखिला लेना पड़ेगा, जहां 5,000 से 8,000 रुपये तक की फीस ली जा रही है।
फीस नियंत्रण और राइट तो एजुकेशन जांच की मांग
अभिभावकों और स्थानीय संगठनों ने निजी स्कूलों की फीस संरचना की जांच और एक समान फीस नीति लागू करने की मांग उठाई है। साथ ही शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के तहत 25% आरक्षित सीटों पर प्रवेश प्रक्रिया में अनियमितताओं की जांच की भी मांग की गई है।
प्रशासन से हस्तक्षेप की अपील
स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग से अपील की है कि अपग्रेडेड स्कूलों में जल्द से जल्द शिक्षकों की नियुक्ति की जाए, बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं और स्कूलों को पूरी तरह संचालित किया जाए, ताकि हजारों छात्रों का भविष्य सुरक्षित हो सके।
