जमशेदपुर: शहर के प्रमुख अंतिम संस्कार स्थल पार्वती घाट में 6 जून से कई नई सुविधाओं की शुरुआत की गई है। पार्वती घाट समिति द्वारा पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता और अंतिम संस्कार व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से यह पहल की गई है।
कम लकड़ी में होगा अंतिम संस्कार, प्रदूषण भी होगा कम
समिति द्वारा घाट परिसर में एक नया लकड़ी आधारित पर्यावरण अनुकूल फरनेस स्थापित किया गया है। यह फरनेस पारंपरिक लकड़ी आधारित चिताओं की तुलना में केवल लगभग 100 किलोग्राम लकड़ी की खपत करता है और कम समय में अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी करता है।फरनेस में चिमनी के माध्यम से धुएं के निष्कासन की व्यवस्था की गई है, जिससे प्रदूषण में कमी आएगी और आसपास का वातावरण अपेक्षाकृत स्वच्छ बना रहेगा।
इस महत्वपूर्ण परियोजना के लिए समाजसेवी श्री कृष्ण मुरारी गुप्ता ने 11 लाख रुपये का योगदान दिया है। पार्वती घाट समिति ने उनके प्रति आभार व्यक्त किया है।
‘देव आत्मा उद्यान’ का भी हुआ शुभारंभ
पार्वती घाट परिसर में “देव आत्मा उद्यान” का भी विकास किया गया है। यह विशेष व्यवस्था नवजात शिशुओं और हिंदू परंपरा के अनुसार पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों के अंतिम संस्कार के लिए बनाई गई है।उद्यान में छह अलग-अलग सीमांकित क्षेत्र विकसित किए गए हैं, जिनमें प्रत्येक क्षेत्र में लगभग 80 बच्चों के दफन की क्षमता है।
समाजसेवियों ने दिया आर्थिक सहयोग
इस परियोजना को साकार करने में कई दानदाताओं ने पांच-पांच लाख रुपये का योगदान दिया है। इनमें शामिल हैं—
रतनलाल अग्रवाल
नवीन एवं नीरज अग्रवाल
अनिल एवं तुषित अग्रवाल
महेश अग्रवाल
खुशमन भाई उदाणी
श्रीमती उमा नाथूलाल
आशा एवं नवीन पोद्दार
श्रीमती मंजू देवी, राहुल एवं विशाल साव
पवित्र निकेतन के नवीनीकरण के लिए भी मिला सहयोग
पार्वती घाट स्थित “पवित्र निकेतन” (शौचालय एवं स्नान गृह) के नवीनीकरण कार्य के लिए श्री निर्मल भाई पांड्या ने 5 लाख रुपये का योगदान दिया है।समिति ने उनके सहयोग के लिए भी आभार जताया और कहा कि इस राशि से घाट परिसर की मूलभूत सुविधाओं को और बेहतर बनाया जाएगा।
समाज के सहयोग से विकसित हो रही सुविधाएं
पार्वती घाट समिति ने कहा कि समाजसेवियों, दानदाताओं और आम नागरिकों के सहयोग से अंतिम संस्कार से जुड़ी व्यवस्थाओं को अधिक मानवीय, स्वच्छ और व्यवस्थित बनाया जा रहा है।समिति ने सभी सहयोगकर्ताओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि भविष्य में भी जनसहयोग से घाट परिसर में और सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा।
