जमशेदपुर : तेल कंपनियों की ओर से आम जनता को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। मंगलवार (19 मई) सुबह से देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में औसतन 90-90 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी लागू कर दी गई है। इस ताज़ा बढ़ोतरी के बाद जमशेदपुर के पेट्रोल पंपों पर भी नई दरें लागू हो चुकी हैं, जिससे वाहन चालकों में भारी मायूसी और आक्रोश देखा जा रहा है।
जमशेदपुर में ईंधन की नई दरें (मंगलवार से प्रभावी):
आज सुबह से शहर के सभी छोटे-बड़े पेट्रोल पंपों पर नई दरें डिजिटल बोर्ड पर अपडेट कर दी गईं।
पेट्रोल की नई कीमत: 101.73 रुपये प्रति लीटर।
डीजल की नई कीमत: 96.66 रुपये प्रति लीटर।
5 दिनों के भीतर दूसरा बड़ा झटका
यह बढ़ोतरी इसलिए अधिक चुभने वाली है क्योंकि महज पांच दिन पहले ही शहरवासियों को महंगाई का एक बड़ा डोज मिला था। तेल कंपनियों ने 15 मई को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एकमुश्त 3-3 रुपये प्रति लीटर का भारी इजाफा किया था। इस तरह अगर देखा जाए, तो पिछले महज 5 दिनों के भीतर ही पेट्रोल और डीजल करीब 3.90 रुपये प्रति लीटर तक महंगे हो चुके हैं। इतनी कम अवधि में दो बार दाम बढ़ने से आम उपभोक्ताओं को संभलने का मौका भी नहीं मिला है।
चौतरफा महंगाई बढ़ने की आशंका से सहमे लोग
ईंधन की कीमतों में लगी इस आग का असर केवल वाहन चलाने वाले कामकाजी लोगों और युवाओं तक सीमित नहीं रहने वाला है। आर्थिक विशेषज्ञों और बाजार विश्लेषकों के अनुसार डीजल महंगा होने का सीधा असर कमर्शियल वाहनों (ट्रक, ट्रेलर, पिकअप वैन) की माल ढुलाई क्षमता और किराए पर पड़ेगा।जमशेदपुर में बाहरी राज्यों और जिलों से आने वाली हरी सब्जियां, फल, दाल और अन्य जरूरी खाद्य सामग्रियों की परिवहन लागत बढ़ जाएगी, जिससे आने वाले दिनों में खुदरा बाजार में आम जरूरत की चीजें और महंगी हो सकती हैं।
“मासिक खर्च संभालना हुआ मुहाल”: शहरवासी
दाम बढ़ने के बाद साकची, बिष्टुपुर और मानगो के पेट्रोल पंपों पर तेल लेने पहुंचे स्थानीय नागरिकों ने सरकार और तेल कंपनियों के खिलाफ अपनी भड़ास निकाली। दैनिक रूप से दोपहिया वाहन से ड्यूटी जाने वाले स्थानीय लोगों का कहना है कि वेतन में कोई बढ़ोतरी नहीं हो रही है, लेकिन पेट्रोल-डीजल के दाम हर हफ्ते बदल रहे हैं।घरेलू महिलाओं और वाहन चालकों का कहना है कि पहले से ही रसोई गैस, राशन और बच्चों की स्कूल फीस ने बजट बिगाड़ रखा था, अब पेट्रोल के 100 पार जाने से मासिक खर्च का संतुलन पूरी तरह बिगड़ गया है। कई सामाजिक संगठनों और नागरिकों ने केंद्र व राज्य सरकार से टैक्स में कटौती कर पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों पर तत्काल नियंत्रण लगाने की मांग की है।
