जमशेदपुर: मानगो में जारी पेयजल संकट को लेकर जमशेदपुर पश्चिमी के विधायक सरयू राय ने मंगलवार को मानगो इनटेकवेल और वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का निरीक्षण किया। लोगों की शिकायत पर व्यवस्था का जायजा लेने पहुंचे सरयू राय ने कहा कि पिछले करीब दो सप्ताह से इलाके के लोग पेयजलापूर्ति की समस्या से परेशान हैं।निरीक्षण के बाद उन्होंने दावा किया कि इनटेकवेल और वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में पर्याप्त पानी उपलब्ध होने के बावजूद कई इलाकों के घरों तक पानी नहीं पहुंच रहा है। उन्होंने इसके पीछे परिचालन और वितरण व्यवस्था में खामियों की आशंका जताई।
पंप चालू, फिर भी कई घरों में नहीं पहुंच रहा पानी
सरयू राय ने कहा कि करीब एक वर्ष पहले उन्होंने पंप के आसपास बालू जमा होने पर उसे तत्काल हटाने की व्यवस्था कराई थी। निरीक्षण के दौरान यह व्यवस्था चालू मिली। उनके अनुसार, पंप भी संचालित थे और मंगलवार को पूरी क्षमता से पानी दिए जाने की जानकारी मिली।इसके बावजूद कई घरों में पेयजल नहीं पहुंचने को लेकर उन्होंने वितरण व्यवस्था पर सवाल उठाए।
इनटेकवेल से प्लांट तक 2137 क्यूमैक्स फ्लो का दावा
वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के निरीक्षण के बाद सरयू राय ने बताया कि प्लांट में पानी 2137 क्यूमैक्स के फ्लो से आ रहा था, जबकि वहां से 1852 क्यूमैक्स के फ्लो से पानी आगे भेजा जा रहा था।उन्होंने सवाल उठाया कि जब इतनी मात्रा में पानी प्लांट से आगे भेजा जा रहा है, तो फिर लोगों के घरों तक पर्याप्त पानी क्यों नहीं पहुंच रहा है।
पानी के फ्लो का समुचित रिकॉर्ड नहीं होने का दावा
सरयू राय ने कहा कि वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में दिनभर में कितनी मात्रा में पानी आया, किस गति से आया और किस गति से आगे भेजा गया, इसका समुचित रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।उन्होंने यह भी कहा कि पानी की टंकियों में कितनी मात्रा में पानी भेजा जा रहा है, इसका भी स्पष्ट रिकॉर्ड नहीं है। दो जोन में पानी भेजे जाने की जानकारी देते हुए उन्होंने सवाल उठाया कि प्रत्येक जोन में कितनी मात्रा में पानी जा रहा है, इसका आंकड़ा उपलब्ध क्यों नहीं है।
वाल्व और पाइपलाइन व्यवस्था पर उठाए सवाल
सरयू राय के अनुसार, जब पानी पूरी रफ्तार से भेजे जाने की बात सामने आ रही है और इसके बावजूद नजदीकी तथा दूर-दराज के मोहल्लों में पेयजल संकट बना हुआ है, तो इसकी वजह परिचालन संबंधी गड़बड़ी हो सकती है।उन्होंने आशंका जताई कि कुछ जगहों पर वाल्व पूरी तरह नहीं खोले जा रहे होंगे। इसके अलावा वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से टंकियों तक पानी पहुंचाने की व्यवस्था में भी खामियां हो सकती हैं।उन्होंने कहा कि प्रत्येक पानी की टंकी के लिए अलग पाइपलाइन नहीं है। एक ही पाइपलाइन से दो टंकियों को पानी दिया जा रहा है और एक टंकी भरने के बाद दूसरी टंकियों को भरने की व्यवस्था है। सरयू राय ने सभी टंकियों के लिए अलग-अलग पाइपलाइन बिछाने की आवश्यकता बताई।
बालीगुमा टंकी के कनेक्शन पर भी सवाल
सरयू राय ने बालीगुमा पानी टंकी का कनेक्शन अब तक नहीं जुड़ने पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि एमजीएम की टंकी से बालीगुमा टंकी तक पानी पहुंचाने के लिए जल्दबाजी में पाइपलाइन बिछाई गई, लेकिन जमीन की स्थिति और कृषि विभाग की जमीन से जुड़े अनुमति के कारण मामला अटक गया।उन्होंने कहा कि बालीगुमा तक पाइपलाइन ले जाने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग की ओर से पाइपलाइन ले जाने का विकल्प अपनाया जा सकता था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।
पेयजल विभाग, मानगो नगर निगम और ठेकेदार पर लगाए आरोप
सरयू राय ने मानगो की पेयजल व्यवस्था में कथित गड़बड़ियों के लिए पेयजल एवं स्वच्छता विभाग, मानगो नगर निगम और संबंधित ठेकेदार को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने आरोप लगाया कि व्यवस्था में सुधार के बजाय अलग-अलग कारण बताए जा रहे हैं और ठेकेदार की ओर से भी लापरवाही की जा रही है।उन्होंने कहा कि वह उपायुक्त से आग्रह करेंगे कि पेयजल एवं स्वच्छता विभाग, मानगो नगर निगम और ठेकेदार को एक साथ बैठाकर यह स्पष्ट कराया जाए कि समस्या कहां है और उसका समाधान क्यों नहीं हो रहा है।
100 करोड़ से अधिक खर्च के बाद भी व्यवस्था पर सवाल
सरयू राय ने कहा कि वह मानगो की पेयजल व्यवस्था और पाइपलाइन नेटवर्क से परिचित हैं। उन्होंने दावा किया कि कई जगह पाइपलाइन ऐसे स्थानों पर बिछाई गई है जहां जमीन ऊंची है। कुछ स्थानों पर टी-जंक्शन और वाल्व व्यवस्था को लेकर भी उन्होंने सवाल उठाए।उन्होंने कहा कि कई जगहों पर लगाए गए वाल्व की जानकारी अधिकारियों के पास स्पष्ट रूप से नहीं है और पुराने कर्मचारियों को ही इनके संचालन की जानकारी है।
सरयू राय ने कहा कि किसी भी योजना में समय के साथ सुधार होना चाहिए, लेकिन उनके अनुसार मानगो पेयजल परियोजना में स्थिति बेहतर होने के बजाय बिगड़ रही है। उन्होंने दावा किया कि परियोजना पर 100 करोड़ रुपये से अधिक खर्च होने के बावजूद पेयजल व्यवस्था में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते तकनीकी और परिचालन संबंधी खामियों को दूर नहीं किया गया तो आने वाले वर्षों में योजना की स्थिति और खराब हो सकती है।
