जमशेदपुर : साकची के समीप कदमा स्थित डी.बी.एम.एस. कॉलेज ऑफ एजुकेशन में विश्व कवि रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती पर विशेष समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि डॉ. भारती सिंह, कॉलेज की सचिव श्रीप्रिया धर्मराजन, सह-सचिव सुधा दिलीप, प्राचार्या डॉ. जूही समर्पिता और उप-प्राचार्या डॉ. मोनिका उप्पल ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर की।
गीतों और नृत्य से दी गई श्रद्धांजलि
बी.एड. की छात्राओं ने टैगोर के जीवन और उनकी अमर रचनाओं पर आधारित कई शानदार प्रस्तुतियां दीं। छात्रा आयोना सेन, दीपिका मदीना, तनुश्री साहा, अर्पिता पॉल, इशिका और स्वस्तिक भट्टाचार्या ने ‘जोखोंन पोरबे न मोर’ की भावपूर्ण प्रस्तुति दी। गुरुदेव के बचपन पर आधारित गीत ‘मेरे चित में’ पर छात्राओं ने सुंदर समूह नृत्य पेश किया। तृषा सरकार और शौमिनी दास के आकर्षक नृत्य ने सभागार में मौजूद सभी दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। वहीं, आकांक्षा और उनकी टीम ने ‘गहना कुसुम’ भाव नृत्य प्रस्तुत कर खूब तालियां बटोरीं।
“कला के बिना शिक्षा अधूरी है” – डॉ. भारती सिंह
मुख्य अतिथि डॉ. भारती सिंह ने अपने संबोधन में टैगोर के शैक्षिक सिद्धांतों की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा “टैगोर जी का मानना था कि वह शिक्षा अधूरी है जिसमें कला का समन्वय न हो। उनके शैक्षिक विचार और मातृभाषा के प्रति प्रेम आज भी हमारे समाज के लिए उतने ही प्रासंगिक हैं जितने पहले थे।”
साहित्य जगत के अमर स्तंभ
प्राचार्या डॉ. जूही समर्पिता ने गुरुदेव को एक बहुआयामी व्यक्तित्व बताते हुए कहा कि वे न केवल एक महान साहित्यकार थे, बल्कि एक कुशल चित्रकार, संगीतकार और दूरदर्शी शिक्षाविद भी थे। उनकी लेखनी ने साहित्य जगत को जो समृद्धि दी है, वह उन्हें हमेशा अमर रखेगी।
सफल आयोजन और समापन
पूरे कार्यक्रम का सफल संयोजन संगीत शिक्षिका अमृता चौधरी के नेतृत्व में हुआ।मौमिता मंडल ने कार्यक्रम का संचालन किया।निकिता तिर्की ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर कॉलेज की सभी शिक्षिकाएं और कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन सामूहिक रूप से ‘वन्दे मातरम’ गान के साथ हुआ।
