जमशेदपुर। टाटानगर रेलवे स्टेशन के वाशिंग लाइन क्षेत्र में कार्य के दौरान हाईटेंशन तार की चपेट में आने से गंभीर रूप से झुलसे रेल कर्मी आशीष माझी की मौत के बाद बवाल थमता नजर नहीं आ रहा है। दोषी अधिकारियों को सस्पेंड करने, उचित मुआवजे और आश्रित को नौकरी देने की मांग को लेकर परिजनों और बस्ती वासियों का धरना प्रदर्शन दूसरे दिन भी स्टेशन परिसर स्थित कार्यालय के बाहर जारी रहा। इस गतिरोध के कारण स्टेशन पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।
सुपरवाइजर के आदेश पर चढ़ा था ट्रेन की छत पर
घटना के संबंध में मिली नई जानकारी के अनुसार, सरजामदा (परसुडीह) का रहने वाला आशीष माझी टाटानगर में एक रेलवे ठेकेदार के अधीन कार्यरत था। घटना वाले दिन वह साइट पर ड्यूटी पर था। आरोप है कि सुपरवाइजर के सीधे आदेश पर वह ट्रेन के कोच के ऊपर मरम्मत कार्य के लिए चढ़ा था।इसी दौरान ऊपर से गुजर रही हाई वोल्टेज हाई टेंशन बिजली लाइन की चपेट में आने से वह बुरी तरह झुलस गया और काफी देर तक दर्द से तड़पता रहा। आनन-फानन में उसे टाटा मेन हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था, जहां 6 जून को इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया।
50 लाख मुआवजा और स्थायी नौकरी की मांग पर अड़े परिजन
आशीष की मौत के बाद आक्रोशित परिजनों और स्थानीय ग्रामीणों ने रेलवे प्रशासन और ठेकेदार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट तौर पर तीन बड़ी मांगें रखी हैं। मृतक के परिवार को आर्थिक सहायता के रूप में 50 लाख रुपये का नगद मुआवजा दिया जाए।आशीष के आश्रित (परिवार के सदस्य) को रेलवे में स्थायी नौकरी प्रदान की जाए। बिना सुरक्षा मानकों के काम कराने वाले दोषी सुपरवाइजर और संबंधित रेलवे अधिकारियों को तत्काल सस्पेंड (निलंबित) किया जाए।
दूसरे दिन भी वार्ता बेनतीजा, पोस्टमार्टम पर रोक
आंदोलन के दूसरे दिन भी रेलवे प्रबंधन या ठेकेदार की ओर से कोई ठोस पहल या लिखित आश्वासन नहीं मिल पाया है। हालांकि, स्थिति को नियंत्रित करने के लिए संबंधित रेलवे अधिकारियों, आरपीएफ और जीआरपी की मौजूदगी में परिजनों के साथ कई दौर की वार्ता जारी है, लेकिन मुआवजा राशि और नौकरी के मुद्दे पर पेच फंसा हुआ है।परिजनों ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी मांगों पर कोई ठोस और लिखित समझौता नहीं होता, वे टीएमएच में रखे आशीष के शव का पोस्टमार्टम नहीं होने देंगे। आंदोलन के लंबा खींचने से रेलवे प्रशासन पर भी दबाव बढ़ता जा रहा है।
