बोकारो: बोकारो स्टील प्लांट (बीएसएल) के एसएमएस-2 विभाग में कार्यरत कर्मी सुभाष चंद्र मोदी की मौत के बाद परिजनों का आक्रोश फूट पड़ा। आश्रित को नौकरी और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर मृतक के परिजनों एवं सैकड़ों स्थानीय लोगों ने बीजीएच (बोकारो जनरल हॉस्पिटल) के मुख्य गेट को जाम कर प्रदर्शन किया। चार दिनों से शव मर्चरी में रखे जाने से नाराज लोगों ने बीएसएल प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
ड्यूटी के दौरान घायल हुए थे सुभाष चंद्र मोदी
परिजनों के अनुसार, 30 अप्रैल को बोकारो स्टील प्लांट में ड्यूटी के दौरान सुभाष चंद्र मोदी गंभीर रूप से घायल हो गए थे। पहले उनका इलाज बीजीएच में कराया गया, इसके बाद उन्हें कोलकाता के अपोलो अस्पताल भेजा गया। परिजनों का आरोप है कि इलाज का खर्च अधिक होने का हवाला देकर उन्हें दोबारा बीजीएच वापस भेज दिया गया।
इलाज में लापरवाही का आरोप, 17 जुलाई को हुई मौत
परिजनों का आरोप है कि हालत बिगड़ने के बावजूद समय पर बेहतर अस्पताल रेफर नहीं किया गया। बाद में 15 जुलाई को उन्हें रांची के मेडिका अस्पताल भेजा गया, जहां 17 जुलाई को इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। परिवार का कहना है कि इलाज में गंभीर लापरवाही बरती गई, जिसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
लिखित आश्वासन मिलने तक अंतिम संस्कार नहीं
मृतक के परिजन आश्रित को नौकरी देने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग पर अड़े हुए हैं। उनका कहना है कि जब तक बीएसएल प्रबंधन लिखित रूप से आश्वासन नहीं देता, तब तक शव का अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा।
प्रदर्शन से प्रभावित रहा आवागमन
बीजीएच के मुख्य गेट पर प्रदर्शन और जाम के कारण कुछ समय के लिए अस्पताल परिसर में आवागमन भी प्रभावित रहा। मौके पर बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन भी सक्रिय रहा।
फिलहाल प्रबंधन के फैसले पर टिकी नजर
बीएसएल कर्मी सुभाष चंद्र मोदी की मौत के बाद मामला संवेदनशील हो गया है। परिजन न्याय, आश्रित को नौकरी और जवाबदेही की मांग को लेकर आंदोलन जारी रखे हुए हैं। अब सभी की नजर बीएसएल प्रबंधन के अगले कदम पर है कि इस मामले का समाधान कब और कैसे निकलता है।
