झारखंड में एसीबी की कार्रवाई : भू-अर्जन और रिंग रोड घोटाले में 17 अधिकारी गिरफ्तार; 150 करोड़ की लूट का पर्दाफाश

रांची/धनबाद: झारखंड भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने प्रदेश के बहुचर्चित भू-अर्जन और रिंग रोड घोटाले में अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। गुरुवार देर रात से शुरू हुई छापेमारी के दौरान एसीबी की 10 अलग-अलग टीमों ने राज्य के 5 जिलों में एक साथ दबिश दी और 17 रसूखदार लोगों को गिरफ्तार कर लिया। इस कार्रवाई ने प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है।

5 जिलों में रात भर चली छापेमारी

एसीबी की टीमों ने रांची, धनबाद, दुमका, गिरिडीह और देवघर में एक साथ छापेमारी की। पूरी रात चले इस ऑपरेशन में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। जांच एजेंसी ने उन अधिकारियों और कर्मियों को निशाना बनाया, जो पिछले कई सालों से जांच के घेरे में थे लेकिन गिरफ्तारी से बच रहे थे।

बर्खास्त डीएलओ समेत कई बड़े अधिकारी गिरफ्तार

गिरफ्तार किए गए लोगों में भू-अर्जन और राजस्व विभाग के कई पूर्व व वर्तमान अधिकारी शामिल हैं। मुख्य गिरफ्तारियां में उदयकांत पाठक: तत्कालीन बर्खास्त जिला भूमि अर्जन पदाधिकारी ),विशाल कुमार: तत्कालीन अंचल अधिकारी ,नीलम सिन्हा: तत्कालीन सर्किल इंस्पेक्टर,कुमारी रत्नाकर: तत्कालीन राजस्व अधिकारी।इनके अलावा भू-अर्जन और अंचल कार्यालय के कई क्लर्क और बिचौलियों को भी हिरासत में लिया गया है।

क्या है पूरा घोटाला?

यह मामला मुख्य रूप से रिंग रोड निर्माण के लिए किए गए भूमि अधिग्रहण से जुड़ा है। आरोप है कि रिंग रोड के लिए जमीन अधिग्रहण के दौरान अधिकारियों ने आपसी मिलीभगत से कागजों में हेरफेर किया। सरकारी और गैर-मजरुआ जमीन को निजी बताकर करोड़ों रुपये का मुआवजा फर्जी तरीके से निकाल लिया गया। समाजसेवी रमेश राही ने इस घोटाले को सबसे पहले 2013 में उठाया था। लंबी लड़ाई के बाद 2015 और 2016 में कुल 34 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

शिकायतकर्ता रमेश राही की प्रतिक्रिया

मामले के मुख्य शिकायतकर्ता रमेश राही ने एसीबी की इस कार्रवाई का स्वागत करते हुए कहा यह जनता के पैसे की खुली लूट थी। अधिकारियों ने मिलकर गरीबों और सरकार की 100 से 150 करोड़ की राशि हड़प ली। मैं सरकार से मांग करता हूँ कि इन सभी आरोपियों की संपत्ति तत्काल जब्त की जाए और वह राशि उन असली रैयतों को दी जाए जिनका मुआवजा ये लोग डकार गए।

जांच का दायरा और बढ़ेगा

एसीबी के सूत्रों के अनुसार, गिरफ्तार किए गए आरोपियों से पूछताछ में कई नए नाम सामने आने की उम्मीद है। इस घोटाले के तार सचिवालय के कुछ बड़े अधिकारियों से भी जुड़े होने की संभावना जताई जा रही है। जब्त किए गए दस्तावेजों की प्रारंभिक जांच में अरबों रुपये के बेनामी निवेश के संकेत भी मिले हैं।

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