जमशेदपुर: उच्च शिक्षा को व्यावहारिक अनुभवों से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए नेचर संस्था एवं अनुग्रह नारायण सिंह शिक्षण एवं सेवा संस्थान द्वारा संयुक्त रूप से जमशेदपुर महिला विश्वविद्यालय की इतिहास एवं भूगोल विषय की छात्राओं के लिए विशेष इंटर्नशिप कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम का संचालन प्राध्यापक एवं जिला पार्षद डॉ. कविता परमार के मार्गदर्शन में किया जा रहा है।
विश्व पर्यावरण दिवस पर सीड बॉल निर्माण कार्यशाला
कार्यक्रम के उद्घाटन के साथ ही विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर छात्राओं के लिए सीड बॉल (बीज गेंद) निर्माण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में छात्राओं को स्थानीय वृक्ष प्रजातियों के बीज, मिट्टी और जैविक खाद की सहायता से सीड बॉल तैयार करने का प्रशिक्षण दिया गया।उन्हें बताया गया कि वर्षा ऋतु के दौरान इन सीड बॉल्स को खाली एवं अनुपयोगी भूमि पर फेंककर हरित आवरण बढ़ाने और जैव विविधता संरक्षण में योगदान दिया जा सकता है। छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।
इतिहास की छात्राएं करेंगी सिंहभूम की विरासत का अध्ययन
इंटर्नशिप के तहत इतिहास विषय की छात्राओं को चार समूहों में विभाजित किया गया है। छात्राएं सिंहभूम जिले के इतिहास, स्वतंत्रता आंदोलन में क्षेत्र की भूमिका, जनजातीय इतिहास, पुरातात्विक स्थलों, स्थानीय संस्कृति, शिक्षा के विकास और सामाजिक परिवर्तन जैसे विषयों पर अध्ययन करेंगी।क्षेत्रीय भ्रमण, अभिलेखीय अध्ययन, साक्षात्कार और मौखिक इतिहास संग्रहण के माध्यम से छात्राएं सिंहभूम की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत का दस्तावेजीकरण करेंगी।
भूगोल की छात्राएं करेंगी एसडीजी आधारित अध्ययन
भूगोल विषय की छात्राओं के लिए तैयार परियोजनाएं संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों पर आधारित हैं। छात्राएं जल संसाधन प्रबंधन, स्वच्छता, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, जैव विविधता संरक्षण, जलवायु परिवर्तन, हरित आवागमन, सतत आजीविका, स्वास्थ्य एवं पोषण जैसे विषयों पर क्षेत्रीय अध्ययन करेंगी।इन परियोजनाओं का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर सतत विकास लक्ष्यों के क्रियान्वयन का मूल्यांकन करना और प्रभावी सुझाव विकसित करना है।
विशेषज्ञ व्याख्यानों का भी होगा आयोजन
कार्यक्रम के दौरान इतिहास लेखन, शोध पद्धति, सांस्कृतिक अध्ययन, स्थानीय प्रशासन, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक न्याय, महिला नेतृत्व और सामुदायिक सहभागिता जैसे विषयों पर विशेषज्ञ व्याख्यान आयोजित किए जाएंगे।
शिक्षा का उद्देश्य समाज और इतिहास से जुड़ना: डॉ. कविता परमार
उद्घाटन अवसर पर डॉ. कविता परमार ने कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य विद्यार्थियों को समाज, संस्कृति और इतिहास से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि सिंहभूम की समृद्ध जनजातीय विरासत और सतत विकास की चुनौतियां अध्ययन के महत्वपूर्ण विषय हैं, जिनसे छात्राओं को शोध और विश्लेषण की नई दिशा मिलेगी।वहीं डॉ. विनीता परमार ने कहा कि किसी भी ज्ञान और नवाचार की शुरुआत प्रश्नों से होती है। उन्होंने छात्राओं को जिज्ञासु, विश्लेषणात्मक और शोधपरक दृष्टिकोण विकसित करने के लिए प्रेरित किया।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप पहल
संस्था के प्रतिनिधियों ने बताया कि यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की उस अवधारणा के अनुरूप है, जिसमें अनुभवात्मक अधिगम, सामुदायिक सहभागिता, स्थानीय ज्ञान और क्षेत्रीय अध्ययन को शिक्षा का अभिन्न हिस्सा माना गया है।प्रोफेसर के. कमलेंदु ने छात्राओं को क्षेत्रीय अध्ययन के दौरान विद्वानों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, प्रशासनिक अधिकारियों और स्थानीय समुदायों से संवाद स्थापित करने के लिए प्रेरित किया।
दो महीने तक चलेगा कार्यक्रम
यह इंटर्नशिप कार्यक्रम दो माह तक संचालित होगा। इस दौरान छात्राएं विभिन्न विषयगत परियोजनाओं पर कार्य करते हुए अध्ययन रिपोर्ट, शोध आलेख, क्षेत्रीय दस्तावेज और प्रस्तुतीकरण तैयार करेंगी।कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के शिक्षकगण, नेचर संस्था के पदाधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता एवं बड़ी संख्या में छात्राएं उपस्थित थीं। छात्राओं ने इसे अपने शैक्षणिक, शोधात्मक और व्यक्तिगत विकास के लिए महत्वपूर्ण अवसर बताया।
