जमशेदपुर: जमशेदपुर के कौमी सिख मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं अधिवक्ता कुलबिंदर सिंह ने सिख धर्म के पवित्र पंच तख्तों में शामिल तख्त श्री हजूर साहिब के प्रबंधन के लिए प्रस्तावित नए अधिनियम को सिख समुदाय की भावनाओं के अनुरूप बनाने की मांग की है।उन्होंने देवेंद्र फडणवीस और भाजपा नेतृत्व से आग्रह किया कि नया कानून ऐसा हो, जिसमें सिख समाज की लोकतांत्रिक भागीदारी और धार्मिक परंपराओं का सम्मान सुनिश्चित किया जाए।
1956 के पुराने अधिनियम को निरस्त करने के प्रस्ताव का किया समर्थन
कुलबिंदर सिंह ने महाराष्ट्र कैबिनेट द्वारा 70 वर्ष पुराने हजूर साहिब अधिनियम, 1956 को निरस्त करने के प्रस्ताव को सकारात्मक कदम बताया। उन्होंने उम्मीद जताई कि नए कानून में प्रबंधन समिति के प्रधान और अन्य पदाधिकारियों का चुनाव चुने हुए सिख प्रतिनिधियों द्वारा किया जाएगा।उन्होंने कहा कि हजूर साहिब का महत्व राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर है, इसलिए प्रबंधन व्यवस्था को भी व्यापक प्रतिनिधित्व वाला स्वरूप दिया जाना चाहिए।
पांच तख्तों के प्रतिनिधियों को मिले स्थान
कौमी सिख मोर्चा ने सुझाव दिया कि देश के पांचों प्रमुख सिख तख्तों के प्रतिनिधियों को नई प्रबंधन संरचना में उचित स्थान दिया जाए। इससे संस्था को राष्ट्रीय स्वरूप मिलेगा और विभिन्न क्षेत्रों के सिखों की भागीदारी सुनिश्चित होगी।
2024 के संशोधन का हुआ था व्यापक विरोध
कुलबिंदर सिंह ने कहा कि तत्कालीन शिंदे सरकार ने 2 फरवरी 2024 को कानून में संशोधन कर बोर्ड के 17 सदस्यों में से 12 सदस्यों के सीधे नामांकन का प्रावधान किया था।इस संशोधन के तहत शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी द्वारा भेजे जाने वाले सदस्यों की संख्या चार से घटाकर दो कर दी गई थी। साथ ही चीफ खालसा दीवान, हजूरी सचखंड दीवान और दो सिख सांसदों की सदस्यता समाप्त कर दी गई थी।
देश-विदेश के सिखों ने जताया था विरोध
उस समय इस बदलाव का विरोध ज्ञानी कुलवंत सिंह, एसजीपीसी तथा देश-विदेश के सिख संगठनों ने किया था। उनका आरोप था कि नामांकन आधारित व्यवस्था से सरकार अप्रत्यक्ष रूप से अपने पसंदीदा लोगों को प्रबंधन समिति में नियुक्त कर सकती है।सिख संगठनों का मानना था कि धार्मिक संस्थाओं का संचालन लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए प्रतिनिधियों द्वारा ही होना चाहिए।
लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मिले प्राथमिकता
कुलबिंदर सिंह ने कहा कि सिख समुदाय की लंबे समय से यह मांग रही है कि हजूर साहिब प्रबंधन समिति का गठन निर्वाचित प्रतिनिधियों के माध्यम से हो। इससे संस्था की पारदर्शिता, जवाबदेही और धार्मिक मर्यादा बनी रहेगी।उन्होंने विश्वास जताया कि महाराष्ट्र सरकार नया अधिनियम तैयार करते समय सिख समाज की भावनाओं और सुझावों को प्राथमिकता देगी।
