झारखंड: वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर का बड़ा कदम; वीआईपी कल्चर छोड़ लौटाई अतिरिक्त सुरक्षा और गाड़ियां, सादगी की हो रही तारीफ

रांची:झारखंड के राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों से एक बेहद सकारात्मक और नजीर पेश करने वाली खबर सामने आ रही है। राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर (कांग्रेस कोटा) इन दिनों अपने एक अभूतपूर्व फैसले को लेकर सुर्खियों में हैं। वित्तीय अनुशासन और सादगी की मिसाल पेश करते हुए कैबिनेट मंत्री ने अपनी सुरक्षा में तैनात 16 सुरक्षा कर्मियों और उनके एस्कॉर्ट के लिए आवंटित तीन (3) सुरक्षा वाहनों को तत्काल प्रभाव से राज्य सरकार को वापस लौटा दिया है।इस बड़े निर्णय के बाद अब वित्त मंत्री बिना किसी तामझाम और भारी-भरकम सुरक्षा लश्कर के, बेहद सादगी के साथ अपने सरकारी कार्यक्रमों और दौरों पर जा रहे हैं।

“जनता ही जनप्रतिनिधि का असली कवच” — वित्त मंत्री

सुरक्षा अमला और गाड़ियों के काफिले को सरेंडर करने के बाद वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर का यह कदम राज्य में सबसे बड़ी चर्चा का विषय बना हुआ है।अपने इस फैसले के पीछे की सोच को साफ करते हुए मंत्री ने कहा “एक लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधि का सबसे बड़ा सुरक्षा कवच और भरोसा खुद जनता ही होती है। जब हम जनता के बीच काम करते हैं, तो हमें उनके और हमारे बीच सुरक्षा की इतनी बड़ी दीवार खड़ी करने की कोई आवश्यकता नहीं है। अनावश्यक सुरक्षा व्यवस्था पर सरकारी खजाने और संसाधनों का फिजूलखर्च कतई उचित नहीं है।”

मितव्ययिता और वित्तीय अनुशासन का अनूठा संदेश

चूंकि राधाकृष्ण किशोर राज्य के वित्त मंत्रालय का जिम्मा संभाल रहे हैं, इसलिए उनके इस कदम को सीधे तौर पर मितव्ययिता’ (सरकारी खर्च में कटौती)और कड़े वित्तीय अनुशासन से जोड़कर देखा जा रहा है। 16 सुरक्षाकर्मियों और 3 एस्कॉर्ट वाहनों के ईंधन व रखरखाव का खर्च सीधे तौर पर सरकारी खजाने पर पड़ता था, जिसे मंत्री ने खुद आगे बढ़कर कम किया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अक्सर राजनेताओं में सुरक्षा घेरा बढ़ाने की होड़ मची रहती है, ऐसे में वित्त मंत्री का यह निर्णय अन्य जनप्रतिनिधियों के लिए एक प्रेरणादायक संदेश है।

सियासी गलियारों में छिड़ी बहस, आम जनता ने किया स्वागत

वित्त मंत्री के इस अप्रत्याशित फैसले ने झारखंड की सियासत में वीआईपी सुरक्षा व्यवस्था और जनप्रतिनिधियों की जीवनशैली को लेकर एक नई बहस को जन्म दे दिया है। राजनीतिक गलियारों में जहां सत्ता पक्ष के लोग इसे सरकार की सादगी व जन-सरोकार की राजनीति बता रहे हैं, वहीं कुछ राजनीतिक विरोधी इसे व्यक्तिगत कार्यशैली का हिस्सा मान रहे हैं। हालांकि, आम जनता और प्रबुद्ध नागरिकों के बीच वित्त मंत्री के इस कदम की चौतरफा सराहना हो रही है। लोगों का कहना है कि अगर हर मंत्री और विधायक इसी तरह की सादगी अपनाए, तो जनता के टैक्स का पैसा बचेगा, जिसका इस्तेमाल जनहित के कार्यों में हो सकेगा।

More From Author

जमशेदपुर बंद पर कांग्रेस का पलटवार: प्रदेश सचिव प्रिंस सिंह ने भाजपा के बंद को बताया ‘नौटंकी’; फरार बार संचालक नीरज सिंह पर भी साधा निशाना

Recent News