जमशेदपुर: राहुल बच्चा मर्डर केस का खुलासा; मास्टरमाइंड शब्बे समेत 4 गिरफ्तार, ‘हाफ एनकाउंटर’ के पैटर्न पर उठने लगे सवाल

जमशेदपुर: मानगो थाना क्षेत्र के गुरुद्वारा रोड मजार के पास बुधवार शाम हुए सनसनीखेज राहुल बच्चा उर्फ राहुल सिंह हत्याकांड में जमशेदपुर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य साजिशकर्ता सहित चार अपराधियों को दबोच लिया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि वारदात के चंद घंटों के भीतर ही पुलिस ने मास्टरमाइंड साहिब सिंह उर्फ शब्बे और उसके तीन सहयोगियों को गिरफ्तार किया। वहीं, गुरुवार तड़के पुलिस मुठभेड़ (हाफ एनकाउंटर) में घायल शब्बे का इलाज एमजीएम अस्पताल में चल रहा है।

ईंट-पत्थर और डंडों से कूचकर की गई थी हत्या; गोली चलने की बात से इंकार

एसएसपी ने प्रेस वार्ता में बताया कि बुधवार शाम करीब 7:30 बजे गुरुद्वारा रोड मजार के समीप इस खूनी वारदात को अंजाम दिया गया था। मृतक राहुल बच्चा के भाई राजा कुमार की लिखित शिकायत पर मानगो थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई। पुलिस ने तुरंत जाल बिछाकर मुख्य आरोपी साहिब सिंह उर्फ शब्बे, सौरभ दत्ता उर्फ बंगाली, आफताब अली बाबा और अमरजीत प्रसाद उर्फ पांडे को गिरफ्तार कर लिया। शुरुआती चर्चाओं में राहुल पर गोली मारकर हत्या करने की बात सामने आई थी, लेकिन एसएसपी ने स्पष्ट किया कि शब्बे और उसके साथियों ने राहुल बच्चा पर ईंट-पत्थर और डंडों से ताबड़तोड़ वार कर उसकी बेरहमी से हत्या की थी। पुलिस फिलहाल गोली चलने के दावे की गहन अनुसंधान (जांच) कर रही है। पुलिस के अनुसार, मृतक राहुल बच्चा और गिरफ्तार किए गए सभी चार अपराधियों का पुराना अपराधिक इतिहास रहा है और वे पहले भी कई मामलों में संलिप्त रहे हैं।

विवाद की वजह: प्रेमिका से बात करने का पुराना रंजिश

एसएसपी ने हत्याकांड के पीछे की मुख्य वजह का खुलासा करते हुए बताया कि यह पूरी घटना आपसी रंजिश और प्रेम प्रसंग से जुड़ी है। मृतक राहुल बच्चा और मुख्य आरोपी साहिब सिंह उर्फ शब्बे के बीच एक ही युवती (प्रेमिका) से बात करने और संबंध रखने को लेकर काफी लंबे समय से गंभीर विवाद चला आ रहा था। इसी विवाद के प्रतिशोध में शब्बे ने अपने साथियों के साथ मिलकर बुधवार शाम राहुल को अकेले पाकर उस पर जानलेवा हमला कर दिया।

तड़के सुबह हुआ एनकाउंटर; पैर में लगी दो गोली

गिरफ्तारी के बाद पुलिस जब आरोपियों की निशानदेही पर हत्या में इस्तेमाल किए गए डंडे, ईंट और छुपा कर रखे गए हथियारों को बरामद करने मानगो के स्मृति पार्क ले गई, तो वहां हाई-वोल्टेज ड्रामा हुआ।एसएसपी ने कहा कि “अपराधियों ने जहां हथियार छुपाए थे, वहां दो पिस्टल बरामद हुईं। इसी बीच शब्बे ने पुलिस को चकमा देकर एक लोडेड पिस्तौल उठा ली और पुलिस टीम पर सीधी फायरिंग झोंक दी। पुलिस ने आत्मरक्षा और बचाव में तत्काल जवाबी गोली चलाई, जो शब्बे के पैर में लगी।”

पुलिस के ‘पैर में गोली मारने’ के पैटर्न पर उठने लगे गंभीर सवाल

इस पूरे मामले में अपराधियों की गिरफ्तारी और त्वरित कार्रवाई की जहां प्रशंसा हो रही है, वहीं जमशेदपुर पुलिस के एनकाउंटर करने के तरीके पर शहर के कानूनी और सामाजिक हलकों में सवाल भी उठने लगे हैं।शहर में यह लगातार तीसरी ऐसी घटनाहै जब पुलिस अपराधियों को उनकी ही निशानदेही पर हथियार बरामद कराने किसी सुनसान जगह या पार्क में लेकर जाती है।अपराधी वहां पहले से छुपाकर रखी लोडेड पिस्तौल निकाल लेता है और पुलिस पर अचानक हमला कर देता है।पुलिस आत्मरक्षा में गोली चलाती है और हर बार अपराधी के पैर में ही सटीक दो गोलियां लगती हैं।एक ही तरह की पटकथा और तीनों घटनाओं में हूबहू एक जैसे परिणाम (पैर में दो गोली लगना) को लेकर अब शहर में यह बहस छिड़ गई है कि क्या यह वास्तव में अचानक हुई मुठभेड़ है या अपराधियों में खौफ पैदा करने के लिए पुलिस द्वारा अपनाई जा रही एक सोची-समझी ‘सख्त रणनीति’ (हाफ एनकाउंटर पैटर्न) है।फिलहाल, पुलिस ने घायल शब्बे को छोड़कर शेष तीनों अपराधियों (सौरभ, आफताब और अमरजीत) को कड़ी सुरक्षा के बीच कोर्ट में पेश करने के बाद न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।

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