राष्ट्रीय क्रिटिकल मिनरल मिशन के अंतर्गत “क्रिटिकल मेटल्स” पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का सफल समापन

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जमशेदपुर।खनन मंत्रालय के राष्ट्रीय क्रिटिकल मिनरल मिशन के अंतर्गत सीएसआईआर-राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला (एनएमएल) द्वारा आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन “क्रिटिकल मेटल्स” का शनिवार को सफल समापन हुआ। इस सम्मेलन का उद्देश्य क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में नवीन तकनीकों, अनुसंधान, और वैश्विक नीतिगत समन्वय पर विचार-विमर्श करना था।तीन दिनों तक चले इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भारत सहित फ्रांस, जर्मनी, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, और जापान से आए वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, नीति विशेषज्ञों तथा औद्योगिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सम्मेलन के दौरान क्रिटिकल मेटल्स के खनन, संवर्धन (बेनिफिसिएशन), द्वितीयक स्रोतों से पुनर्चक्रण, तथा अंतरराष्ट्रीय नीतियों और आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन जैसे विषयों पर गहन तकनीकी सत्र आयोजित किए गए।

द्वितीयक स्रोतों से क्रिटिकल मेटल्स की संभावनाएं केंद्र में रहीं

सम्मेलन के तीसरे दिन फ्रांस की यूनिवर्सिटी दे लॉरेन, ज्योरिसोर्सेज़ के प्रोफेसर अलेक्ज़ांद्र शेन ने मुख्य व्याख्यान प्रस्तुत किया, जिसमें उन्होंने बैटरी रीसाइक्लिंग की उन्नत विधियों पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बैटरी रीसाइक्लिंग वर्तमान समय में क्रिटिकल मिनरल्स की प्राप्ति का एक प्रमुख द्वितीयक स्रोत बनकर उभर रही है, जो स्थायी ऊर्जा समाधान की दिशा में अत्यधिक संभावनाओं से भरा हुआ क्षेत्र है।इसके पश्चात फ्रांस के आईजीपी-सीएनआरएस से प्रोफेसर एरिक डी. वैन हुलबुश ने प्रेरणादायी प्लेनरी व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार प्रकृति से प्रेरणा लेकर इलेक्ट्रॉनिक कचरे (ई-वेस्ट) जैसे द्वितीयक स्रोतों से मूल्यवान क्रिटिकल मेटल्स की प्राप्ति संभव है। यह दृष्टिकोण न केवल संसाधन संरक्षण में सहायक होगा, बल्कि पर्यावरणीय स्थिरता को भी बढ़ावा देगा।तीसरे दिन के तकनीकी सत्र पूरी तरह द्वितीयक स्रोतों के पुनर्चक्रण पर केंद्रित रहे। विशेषज्ञों का मानना था कि द्वितीयक संसाधनों में क्रिटिकल मिनरल्स की अपार संभावनाएं निहित हैं। इनका पुनर्चक्रण न केवल नए संसाधनों की आपूर्ति सुनिश्चित करेगा, बल्कि ठोस अपशिष्ट को लैंडफिल में जाने से भी रोकेगा, जिससे पर्यावरणीय प्रभावों में कमी आएगी।

शोधार्थियों को मिला मंच, श्रेष्ठ प्रस्तुतियों को किया गया सम्मानित

सम्मेलन के दौरान विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के शोधार्थियों द्वारा मौखिक एवं पोस्टर प्रस्तुतियाँ दी गईं। उत्कृष्ट प्रस्तुतियों को सम्मानित करते हुए, मौखिक प्रस्तुति श्रेणी में दो प्रथम पुरस्कार, तथा पोस्टर श्रेणी में एक प्रथम पुरस्कार प्रदान किया गया। इसके अतिरिक्त दोनों श्रेणियों में दो-दो द्वितीय और दो-दो तृतीय पुरस्कार भी दिए गए।शोध को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से सम्मेलन के समापन सत्र में छात्रों को 15 ट्रैवल ग्रांट तथा वरिष्ठ शोधकर्ताओं को 5 ट्रैवल ग्रांट प्रदान किए गए, जिससे उन्हें भविष्य में अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपने कार्य प्रस्तुत करने का अवसर मिल सकेगा।

नीति और तकनीक का समन्वय — भविष्य की दिशा

सम्मेलन ने भारत में क्रिटिकल मेटल्स के क्षेत्र में अनुसंधान की दिशा और प्राथमिकताओं को स्पष्ट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस मंच ने न केवल तकनीकी विशेषज्ञों को एकजुट किया, बल्कि नीति निर्धारण और आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन से जुड़े प्रतिनिधियों को भी जोड़ा, जो भविष्य में क्रिटिकल मिनरल्स के व्यापार और प्रौद्योगिकीय सहयोग को सुगम बनाने में अहम भूमिका निभाएंगे।सम्मेलन के आयोजकों ने विश्वास व्यक्त किया कि इस तरह के वैश्विक विमर्श भारत को क्रिटिकल मिनरल्स की आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाने में मील का पत्थर साबित होंगे।

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