
बोकारो:बोकारो स्टील प्लांट में हाल के दिनों में लगातार हो रहे हादसों को गंभीरता से लेते हुए, बोकारो जिला प्रशासन, आपदा प्रबंधन विभाग और बोकारो स्टील प्रबंधन द्वारा आज प्लांट परिसर में गैस रिसाव आपदा प्रबंधन पर एक व्यापक मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। इस ड्रिल का उद्देश्य प्लांट में आपूर्ति होने वाली विभिन्न प्रकार की गैसों से उत्पन्न होने वाली संभावित आपातकालीन स्थितियों से निपटना था।
एक घंटे में स्थिति पर काबू, चार हताहत
मॉक ड्रिल में एनडीआरएफ, एसडीआरएफ ,सीआईएसएफ और बोकारो स्टील के स्वास्थ्य विभाग की टीम ने बेहतर समन्वय का परिचय दिया। टीम ने एक घंटे के अंदर गैस रिसाव पर काबू पाया और प्रभावित कर्मियों को बेहतर इलाज के लिए बोकारो जनरल अस्पताल भेजा। मौके पर पहुंची तीन फायर ब्रिगेड की गाड़ियों के साथ-साथ एलडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमों ने रिसाव को नियंत्रित किया।इस अभ्यास के दौरान, काल्पनिक रूप से चार मजदूरों की जान गई, जबकि कई घायलों को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया।
सेफ्टी पर डीसी और एसपी का वक्तव्य
मॉक ड्रिल के बाद, जिला प्रशासन के अधिकारियों ने प्लांट सेफ्टी पर जोर दिया और तैयारियों की समीक्षा की।डीसी अजय नाथ झा ने कहा कि “सेफ्टी किसी भी प्लांट के ग्रंथ का एक पैमाना बन सकता है।” उन्होंने जोर दिया कि अगर प्लांट में सेफ्टी है, तो प्लांट भी बढ़ेगा। डीसी ने BSP के त्वरित रिस्पांस टाइम की सराहना की, लेकिन यह भी कहा कि घटना के बाद रिस्पांस कितना जल्दी होता है, वह महत्वपूर्ण है।उन्होंने कहा कि चूंकि एनडीआरएफ की टीम बोकारो से काफी दूर है, ऐसे में ट्रेनिंग देकर कुछ विशेष तैयारी रखने का प्लान तैयार किया जा रहा है।एसपी हरविंदर सिंह ने कहा कि एक्सीडेंट कोई जानकार नहीं होता, यह आकस्मिक होता है, इसलिए हम सिर्फ तैयारी कर सकते हैं।उन्होंने कहा कि तैयारी हमारी पूरी रहती है, लेकिन उसे हम कितना अच्छे से हैंडल कर सके वह जरूरी है। इसको लेकर जल्द ही एक इंटरनल बैठक भी आयोजित की जाएगी।इस मॉक ड्रिल को प्लांट के सुरक्षा उपायों की प्रभावशीलता की जांच करने और भविष्य की आपदाओं से निपटने के लिए तैयारियों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
