मनरेगा का नाम बदलने के विरोध में सीपीआई का जोरदार प्रदर्शन, साकची गोलचक्कर पर केंद्र सरकार का पुतला दहन

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जमशेदपुर। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) का नाम बदलने के मुद्दे को लेकर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने सोमवार को जमशेदपुर में केंद्र सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। पार्टी कार्यकर्ता बड़ी संख्या में साकची गोलचक्कर पहुंचे, जहां उन्होंने केंद्र सरकार का पुतला दहन कर जमकर नारेबाजी की।

राम के नाम पर राजनीति करने का आरोप

प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे सीपीआई जिला सचिव अम्बुज ठाकुर ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार भगवान राम के नाम पर राजनीति कर रही है और महात्मा गांधी के नाम को समाप्त करने की साजिश रची जा रही है। उन्होंने कहा कि मनरेगा जैसी महत्वपूर्ण योजना का नाम बदलना देश की जनता और ग्रामीण मजदूरों की भावनाओं के साथ सीधा खिलवाड़ है।उन्होंने कहा मनरेगा सिर्फ एक योजना नहीं, बल्कि गरीब, मजदूर और ग्रामीण भारत की आजीविका से जुड़ा अधिकार है। इसका नाम बदलना महात्मा गांधी की विचारधारा को मिटाने की कोशिश है

‘जी-राम-जी बिल’ नाम वापस लेने की मांग

सीपीआई नेताओं और कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार से ‘जी-राम-जी बिल’ नाम को तत्काल वापस लेने और योजना का नाम मनरेगा ही बनाए रखने की मांग की। पार्टी का कहना है कि योजना के नाम में बदलाव से जनता के बीच भ्रम फैलाया जा रहा है और इसके मूल उद्देश्य को कमजोर किया जा रहा है।

पूंजीपतियों के पक्ष में काम करने का आरोप

प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार पर पूंजीपतियों के हित में काम करने का आरोप भी लगाया। पार्टी नेताओं ने कहा कि यह सरकार गरीबों की योजनाओं को कमजोर कर रही है और देश की सार्वजनिक संपत्तियों को बड़े पूंजीपतियों के हाथों बेचने का काम कर रही है।

कुछ देर अफरा-तफरी, पुलिस बल रहा तैनात

पुतला दहन के दौरान साकची गोलचक्कर पर कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जिससे यातायात भी आंशिक रूप से प्रभावित हुआ। हालांकि मौके पर मौजूद पुलिस बल की सक्रियता से स्थिति को नियंत्रित कर लिया गया और प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ।

आंदोलन जारी रखने की चेतावनी

सीपीआई नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि केंद्र सरकार ने मनरेगा का नाम बदलने का फैसला वापस नहीं लिया, तो पार्टी राज्यव्यापी और राष्ट्रव्यापी आंदोलन शुरू करेगी।इस प्रदर्शन में पार्टी के कई वरिष्ठ नेता, कार्यकर्ता और समर्थक शामिल रहे, जिन्होंने केंद्र सरकार के फैसले के खिलाफ एकजुट होकर आवाज बुलंद की।

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