
गोइलकेरा : जिले में जंगली हाथियों का आतंक अब जानलेवा होता जा रहा है। रविवार तड़के गोइलकेरा प्रखंड के कुईड़ा पंचायत अंतर्गत कितापी गांव में हाथियों के झुंड ने एक महिला पर हमला कर उसे बेरहमी से रौंद दिया। इस दर्दनाक हादसे में महिला की मौके पर ही मौत हो गई। इस घटना के बाद से पूरे इलाके में मातम और दहशत का माहौल है।
भोर में मौत बनकर आए गजराज
मृतक महिला की पहचान 47 वर्षीय चंपा कुई के रूप में की गई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, रविवार सुबह करीब 4:30 बजे चंपा कुई अपने घर के पास ही मौजूद थीं। इसी दौरान जंगल से भटके हाथियों के एक झुंड ने अचानक गांव में प्रवेश किया। महिला जब तक कुछ समझ पाती या भाग पाती, हाथियों ने उसे अपनी चपेट में ले लिया और कुचल दिया।
एक सप्ताह में 5 मौतें: दहशत में ग्रामीण
कितापी गांव की इस घटना ने वन विभाग की सुरक्षा तैयारियों की पोल खोल दी है। ग्रामीणों में विभाग के प्रति भारी आक्रोश व्याप्त है। स्थानीय लोगों के अनुसार, पिछले एक सप्ताह के भीतर जंगली हाथियों के अलग-अलग हमलों में अब तक 5 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। क्षेत्र में हाथियों की लगातार मौजूदगी के कारण ग्रामीण इस कदर डरे हुए हैं कि शाम ढलते ही लोग खुद को घरों में कैद कर ले रहे हैं। खेती-बाड़ी और दैनिक कामकाज भी पूरी तरह प्रभावित हो गया है।
वन विभाग की कार्रवाई और मुआवजा
घटना की सूचना मिलने पर वन विभाग के रेंजर राम नंदन राम अपनी टीम के साथ मौके पर पहुँचे और स्थिति का जायजा लिया। विभाग द्वारा शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजने की प्रक्रिया शुरू की गई है। रेंजर ने बताया कि सरकारी प्रावधानों के अनुसार मृतक के परिजनों को मुआवजा राशि उपलब्ध कराई जाएगी और इसके लिए आवश्यक कागजी कार्रवाई तुरंत शुरू कर दी गई है।
ग्रामीणों की मांग: “मुआवजा नहीं, सुरक्षा चाहिए”
कितापी गांव के निवासियों का कहना है कि वन विभाग केवल घटना होने के बाद आता है और कागजी औपचारिकता पूरी करता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि हाथियों को रिहाइशी इलाकों से दूर रखने के लिए स्थायी बैरिकेडिंग, हाथी भगाओ दस्ता की स्थायी तैनाती और सौर ऊर्जा चालित बाड़ जैसी व्यवस्था की जाए।
