सुर-ताल से सजेगी लौहनगरी: बिष्टुपुर में 10 जनवरी को ‘बैठकी संध्या’; दिग्गज सितार वादक पं. अंजन चट्टोपाध्याय बिखेरेंगे जलवा

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जमशेदपुर: भारतीय शास्त्रीय संगीत की अनमोल विरासत को सहेजने और उसे जन-जन तक पहुँचाने की दिशा में बंशी बोस म्यूज़िक फाउंडेशन एक सराहनीय पहल करने जा रहा है। आगामी 10 जनवरी 2026 (शनिवार) को शहर के बिष्टुपुर इलाके में एक गरिमामय सांस्कृतिक शाम “बैठकी संध्या – ए क्लासिकल म्यूज़िक ईवनिंग (2026)” का आयोजन किया जाएगा।कार्यक्रम 10 जनवरी 2026, शाम 5:30 बजे से ‘पितृछाया’, के रोड, बिष्टुपुर (श्री लेदर शोरूम के पास) आयोजित होगा। प्रवेश: पूर्णतः निःशुल्क है।

दिग्गज कलाकारों की होगी जुटान

इस संगीत संध्या का मुख्य आकर्षण कोलकाता से पधार रहे सुप्रसिद्ध शास्त्रीय संगीतज्ञ पं. अंजन चट्टोपाध्याय होंगे। उनकी प्रस्तुति के साथ-साथ शहर के अन्य उभरते और स्थापित कलाकार भी अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे।सितार वादन: श्री रियॉन बोस।गायन (वोकल): श्रीमती तानिया रॉय शेखावत।संगतकार: हारमोनियम पर श्री अंजन रॉय, तबले पर श्री स्वरूप मोइत्रा और श्री कार्तिक कर्मकार सुरों को ताल देंगे।

विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति और सम्मान समारोह

कार्यक्रम में एक्सलआरआई जमशेदपुर के वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. शरद शरीन मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करेंगे। इस अवसर पर संगीत और समाज सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाली दो विभूतियों श्री अंजन राय (संगीत गुरु): संगीत के क्षेत्र में निरंतर सेवाओं के लिए और श्री विजय यादव (महासचिव, टाटा टिमकेन वर्कर्स यूनियन): सामाजिक-सांस्कृतिक क्षेत्र में सक्रिय योगदान के लिए सम्मानित किया जाएगा। साथ ही, इस मौके पर फाउंडेशन की एक विशेष स्मारिका का विमोचन भी किया जाएगा।

एक गैर-व्यावसायिक और सांस्कृतिक पहल

बंशी बोस म्यूज़िक फाउंडेशन ने स्पष्ट किया है कि यह आयोजन पूरी तरह से अ-व्यावसायिक है। फाउंडेशन का मानना है कि शास्त्रीय संगीत को फलने-फूलने के लिए किसी आलीशान मंच से ज्यादा संवेदनशील श्रोताओं के सच्चे समर्थन की आवश्यकता होती है।

फाउंडेशन की अपील

“हम इस सांस्कृतिक पहल को सफल बनाने के लिए संगीत प्रेमियों से स्वैच्छिक सहयोग का आग्रह करते हैं। प्राप्त सहयोग राशि का उपयोग कलाकारों के मानदेय और आयोजन की व्यवस्थाओं में किया जाएगा, ताकि शहर में एक सुसंस्कृत वातावरण निर्मित हो सके।”

क्यों खास है यह आयोजन?

जमशेदपुर जैसे औद्योगिक शहर में शास्त्रीय संगीत की ‘बैठकी’ परंपरा को जीवित रखना अपने आप में अनूठा है। यह कार्यक्रम न केवल कलाकारों को एक मंच प्रदान करेगा, बल्कि नई पीढ़ी को भी अपनी जड़ों से जुड़ने का अवसर देगा।

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