
सरायकेला/चांडिल: चाईबासा के बाद अब सरायकेला जिले के चांडिल वन रेंज अंतर्गत कुकड़ू प्रखंड में हाथियों के आतंक ने ग्रामीणों की नींद उड़ा दी है। कुकड़ू पंचायत के बेरासिसिरुम अंतर्गत रूपरु गांव और खरकोचा टोला में बीते कई दिनों से जंगली हाथियों का झुंड डेरा डाले हुए है। बीती रात हाथियों ने खेतों में घुसकर जमकर उत्पात मचाया और कई किसानों की महीनों की मेहनत को चंद घंटों में मिट्टी में मिला दिया।
किसानों की मेहनत पर फिरा पानी
जंगली हाथियों ने बीती रात फसलों को निशाना बनाया, जिससे किसानों को भारी आर्थिक क्षति हुई है। हाथी ने मिहिर महतो, बालिका महतो और गौतम महतो के खेतों में लगी आलू की फसल को पूरी तरह रौंदकर नष्ट कर दिया।किसान सुरेन महतो की बांधागोभी (क्रेम) और नरेंद्र नाथ महतो की खेत में खड़ी धान की फसल को भी हाथियों ने चट कर दिया और पैरों तले कुचल दिया।किसानों का कहना है कि वे कर्ज लेकर खेती करते हैं और ऐन फसल तैयार होने के समय हाथियों के हमले ने उन्हें दाने-दाने को मोहताज कर दिया है।
ग्रामीणों में वन विभाग के प्रति भारी आक्रोश
गांव में दहशत का आलम यह है कि शाम ढलते ही लोग घरों में दुबकने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि हाथियों की आवाजाही की सूचना देने के बावजूद वन विभाग सो रहा है। अब तक न तो हाथियों को खदेड़ने के लिए कोई टीम भेजी गई है और न ही टॉर्च, पटाखे या हाथी भगाने के अन्य साधन उपलब्ध कराए गए हैं।
प्रमुख मांगें और चेतावनी
प्रभावित किसानों और ग्रामीणों ने एकजुट होकर वन विभाग से गांव और आसपास के जंगली रास्तों पर वन विभाग की गश्ती बढ़ाई जाए।जंगली हाथियों को बस्ती से दूर सुरक्षित रूप से घने जंगलों की ओर भेजा जाए।जिन किसानों की फसल बर्बाद हुई है, उनका तत्काल आकलन कर उचित मुआवजा दिया जाए।ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि अगले 48 घंटों के भीतर वन विभाग ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो वे मुख्यालय का घेराव करेंगे और उग्र आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।
