जमशेदपुर: प्रथम पूर्वी सिंहभूम साहित्य उत्सव 2026 का भव्य आगाज; आदिवासी भाषा और साहित्य के वैश्विक स्वरूप पर मंथन

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जमशेदपुर: लौहनगरी जमशेदपुर के सांस्कृतिक इतिहास में आज एक नया अध्याय जुड़ गया। जिले के पहले ‘पूर्वी सिंहभूम साहित्य उत्सव 2026’ का विधिवत शुभारंभ हुआ। दीप प्रज्वलन के साथ शुरू हुए इस ऐतिहासिक समारोह में जिले के साहित्य प्रेमियों, बुद्धिजीवियों, कलाकारों और जिला प्रशासन के अधिकारियों का हुजूम उमड़ पड़ा। यह उत्सव केवल शब्दों का संगम नहीं, बल्कि झारखंड की अस्मिता और भाषाई विरासत का प्रतिबिंब बनकर उभरा है।

विचार गोष्ठी: “झारखण्डी–आदिवासी भाषा साहित्य की विश्व दृष्टि”

उद्घाटन सत्र के बाद आयोजित मुख्य विचार गोष्ठी ने सबका ध्यान आकर्षित किया। इस चर्चा का विषय ‘झारखण्डी–आदिवासी भाषा साहित्य की विश्व दृष्टि’ रहा, जिसमें देश के प्रख्यात साहित्यकार डॉ. अनुज लुगुन और डॉ. पार्वती तिर्की ने मुख्य वक्ता के रूप में शिरकत की। डॉ. अनुज लुगुन ने बताया कि आदिवासी साहित्य केवल जल, जंगल और जमीन की बात नहीं करता, बल्कि यह प्रकृति के साथ जीने की एक वैश्विक फिलॉसफी (दर्शन) है। डॉ. पार्वती तिर्की ने आदिवासी भाषाओं की समृद्ध परंपरा और उनके संरक्षण की चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि नई पीढ़ी को अपनी मातृभाषा के साहित्य से जुड़ना अनिवार्य है।

साहित्य, कला और जायके का अद्भुत संगम

साहित्य उत्सव का परिसर केवल गंभीर चर्चाओं तक सीमित नहीं रहा। यहाँ झारखंड की विविधता को दर्शाते हुए कई स्टॉल लगाए गए थे। स्थानीय कलाकारों द्वारा बनाई गई कलाकृतियों और हस्तशिल्प ने आगंतुकों का मन मोह लिया। झारखंड के पारंपरिक व्यंजनों के स्टॉल्स पर लोगों की भारी भीड़ रही। धुसका, छिलका रोटी और स्थानीय पकवानों की खुशबू ने उत्सव के माहौल को और भी जीवंत बना दिया।साहित्य प्रेमियों के लिए दुर्लभ पुस्तकों और झारखंडी लेखकों की कृतियों का विशेष संग्रह उपलब्ध कराया गया।

प्रशासन का विजन: युवाओं को साहित्य से जोड़ना

मौके पर उपस्थित अनुमंडल पदाधिकारी ने इस आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि यह महोत्सव झारखंड की भाषाई और सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान देगा। उन्होंने इसे युवा पीढ़ी को उनकी जड़ों और साहित्य से जोड़ने का एक सशक्त प्रयास बताया।

आगामी आकर्षण

यह तीन दिवसीय उत्सव आने वाले दिनों में और भी रोमांचक होने वाला है। महोत्सव के अगले चरणों में प्रख्यात कवियों द्वारा कविता पाठ,नई पुस्तकों का विमोचन,झारखंड की लोक परंपराओं पर आधारित सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ।लेखकों और पाठकों के बीच संवाद सत्र।

प्रथम पूर्वी सिंहभूम साहित्य उत्सव 2026 जिले के साहित्यिक इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हो रहा है, जिसने साहित्य, संस्कृति और समाज को एक साझा मंच प्रदान किया है।

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