जमशेदपुर: टाटा मोटर्स महामंत्री आरके सिंह को धमकी मामले में उबाल; संजय सिंह हितैषी बोले- “औद्योगिक माहौल बिगाड़ने की साजिश”

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जमशेदपुर: टाटा मोटर्स यूनियन के महामंत्री आरके सिंह को बंटी सिंह द्वारा खुलेआम धमकी दिए जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। झारखंड क्षत्रिय संघ (टेल्को इकाई) के अध्यक्ष और आमबगान छठ पूजा समिति के अध्यक्ष संजय सिंह हितैषी ने इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा की है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह की हरकतों से शहर के औद्योगिक वातावरण को खराब करने का प्रयास किया जा रहा है।

“धमकी के पीछे छिपे नकाबपोशों का हो पर्दाफाश”

संजय सिंह हितैषी ने जिला प्रशासन और पुलिस से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि बंटी सिंह द्वारा जिस तरह से महामंत्री को धमकी दी गई है, उसके पीछे कौन से ‘नकाबपोश’ चेहरे सक्रिय हैं, इसका खुलासा होना अनिवार्य है। उन्होंने संदेह जताया कि यह किसी गहरी साजिश का हिस्सा हो सकता है ताकि कंपनी और मजदूरों के बीच तालमेल को बिगाड़ा जा सके।

मजदूर हितों की अनदेखी और निजी स्वार्थ का आरोप

महामंत्री आरके सिंह का बचाव करते हुए संजय सिंह हितैषी ने कहा आरके सिंह ने साल 2017 से अब तक मजदूर हित में ऐतिहासिक कार्य किए हैं। उन्होंने कई ऐसे समझौते कराए हैं जिससे सीधे तौर पर कर्मचारियों को वित्तीय और सेवा लाभ मिला है। बंटी सिंह इन कार्यों की अनदेखी कर केवल अपना वर्चस्व स्थापित करना चाहते हैं। उनका मुख्य उद्देश्य ठेकेदारी और बिजनेस सेट करना है। कंपनी पर दबाव बनाकर वे उन कार्यों का श्रेय लेना चाह रहे हैं जो यूनियन ने मेहनत से हासिल किए हैं।

राजनीतिक अतीत और आचरण पर सवाल

संजय सिंह ने बंटी सिंह के पिछले आचरण का भी हवाला दिया। उन्होंने कहा कि बंटी सिंह पहले भी विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं और उस दौरान भी उन्होंने जनप्रतिनिधियों के खिलाफ अनर्गल बयानबाजी की थी। उन्होंने टाटा मोटर्स प्रबंधन से अपील की कि वे ऐसी धमकियों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाएं और मजदूरों के साथ बने भरोसे के रिश्ते को सुरक्षित रखें।

सामाजिक सौहार्द की अपील

चूंकि बंटी सिंह भी क्षत्रिय समाज से ही ताल्लुक रखते हैं, इसलिए संजय सिंह हितैषी ने एक जिम्मेदार सामाजिक पदाधिकारी के नाते बीच-बचाव की भी बात कही। उन्होंने कहा हमारा प्रयास रहेगा कि इस मामले का शांतिपूर्ण समाधान निकल सके। समाज में आपसी सौहार्द बना रहना चाहिए, लेकिन किसी को भी औद्योगिक शांति भंग करने या किसी पदाधिकारी को डराने-धमकाने की छूट नहीं दी जा सकती।”

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