
जमशेदपुर: टाटानगर रेलवे स्टेशन के कायाकल्प और री-डेवलपमेंट योजना को गति देने के लिए शुक्रवार को रेलवे प्रशासन ने जिला प्रशासन के सहयोग से एक बड़ा अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया। भारी पुलिस बल की मौजूदगी में स्टेशन चौक से कीताडीह और बागबेड़ा की ओर जाने वाले मार्गों पर अवैध रूप से बने 27 दुकानों और 5 मकानों को ध्वस्त कर दिया गया।
हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत, चला बुलडोजर
अतिक्रमणकारियों ने इस कार्रवाई को रोकने के लिए झारखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हालांकि, शुक्रवार तक अदालत से किसी भी प्रकार का स्थगन आदेश नहीं मिलने के बाद प्रशासन ने पूर्व निर्धारित योजना के तहत कार्रवाई शुरू की। गुरुवार शाम को ही माइक से अंतिम चेतावनी दी गई थी, जिसके बाद शुक्रवार सुबह ही मौके पर बुलडोजर पहुँच गए।
इन क्षेत्रों में हुई कार्रवाई
रेलवे की इस कार्रवाई का दायरा काफी विस्तृत रहा। मुख्य रूप से स्टेशन चौक से कीताडीह जाने वाला मुख्य मार्ग,बीएसएनएल कार्यालय के समीप का क्षेत्र,बागबेड़ा मार्ग और गोलपहाड़ी गोलचक्कर और गोलपहाड़ी के पास स्थित शराब दुकान समेत अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान।
मजिस्ट्रेट और भारी सुरक्षा बल की तैनाती
कार्रवाई के दौरान किसी भी प्रकार के विरोध की स्थिति से निपटने के लिए जमशेदपुर के अंचलाधिकारी मनोज कुमार बतौर मजिस्ट्रेट तैनात रहे। उनके साथ आरपीएफ, जीआरपी और जिला पुलिस के जवान बड़ी संख्या में मौजूद थे। प्रशासन ने बताया कि केवल 4 दुकानदारों को मानवीय आधार पर अपना सामान समेटने के लिए 3 दिनों की अतिरिक्त मोहलत दी गई है, जबकि शेष 32 संरचनाओं को हटा दिया गया है।
रोजी-रोटी का संकट: 40-50 वर्षों से जमी थीं दुकानें
कार्रवाई के दौरान प्रभावित दुकानदारों की आंखों में मायूसी साफ दिखी। दुकानदारों का कहना है कि वे यहाँ पिछले 40 से 50 वर्षों से दुकान चला रहे थे और नियमित रूप से किराया दे रहे थे। दुकानों के टूटने से करीब 100 से अधिक लोगों (दुकानदार और उनके कर्मचारी) के सामने जीविकोपार्जन का गंभीर संकट खड़ा हो गया है दुकानदारों ने सरकार और रेलवे से मांग की है कि उन्हें किसी अन्य स्थान पर पुनर्वासित किया जाए ताकि उनकी आजीविका चलती रहे।
क्यों जरूरी थी यह कार्रवाई?
टाटानगर स्टेशन को विश्वस्तरीय स्टेशन बनाने के लिए केंद्र सरकार की अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत री-डेवलपमेंट का कार्य चल रहा है। इसके लिए स्टेशन के चारों ओर पहुंच मार्ग को चौड़ा करना और नई संरचनाओं का निर्माण किया जाना अनिवार्य है। इसी मास्टर प्लान को लागू करने के लिए यह जमीन खाली कराई गई है।
