
जमशेदपुर : ऋतुराज बसंत के आगमन और ज्ञान की देवी मां सरस्वती की पूजा में अब कुछ ही दिन शेष हैं। लौहनगरी के बाजारों और मूर्तिकारों की कार्यशालाओं में रौनक लौटने लगी है। शहर के मूर्तिकार दिन-रात एक कर प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। इस वर्ष बाजार के रुझान कुछ बदले हुए नजर आ रहे हैं, जहां बड़ी मूर्तियों के बजाय छोटी और मध्यम आकार की प्रतिमाओं की मांग में भारी इजाफा देखा जा रहा है।
बागबेड़ा के कलाकारों की बढ़ी व्यस्तता
बागबेड़ा ट्रैफिक कॉलोनी के प्रसिद्ध मूर्तिकार दुलाल पाल इन दिनों अपनी कार्यशाला में मूर्तियों की साज-सज्जा और पेंटिंग के काम में व्यस्त हैं। उन्होंने बताया कि इस वर्ष उन्होंने मां सरस्वती की 80 से अधिक प्रतिमाएं तैयार की हैं। मूर्तियों के फिनिशिंग टच के लिए प्राकृतिक रंगों और आकर्षक वस्त्रों का उपयोग किया जा रहा है।
क्यों है छोटी मूर्तियों की अधिक मांग?
दुलाल पाल के अनुसार, इस साल ग्राहकों की पसंद में बदलाव आया है। उन्होंने बताया कि पूजा का आयोजन करने वाले ज्यादातर स्कूली छात्र और घर के बच्चे हैं। बजट और सादगी को ध्यान में रखते हुए बच्चे छोटी मूर्तियों को प्राथमिकता दे रहे हैं।घरों में व्यक्तिगत रूप से पूजा करने वाले परिवारों की संख्या बढ़ने से छोटी प्रतिमाओं की बुकिंग अधिक हो रही है।हालांकि उन्होंने कई भव्य और बड़ी मूर्तियां भी बनाई हैं, लेकिन उनकी बुकिंग अब तक धीमी है। मूर्तिकारों को उम्मीद है कि पूजा के अंतिम दो-तीन दिनों में समितियों द्वारा बड़ी मूर्तियां भी ले जाई जाएंगी।
बढ़ती लागत और मूर्तिकारों की उम्मीद
मूर्तिकारों का कहना है कि कच्ची मिट्टी, पुआल, सुतली और रंगों की कीमतों में पिछले वर्ष की तुलना में वृद्धि हुई है। इसके बावजूद, वे कम मुनाफे पर मूर्तियां बेच रहे हैं ताकि पूजा का उत्साह बना रहे। दुलाल पाल ने विश्वास व्यक्त किया कि जैसे-जैसे बसंत पंचमी की तिथि नजदीक आएगी, उनकी मेहनत का फल मिलेगा और सभी प्रतिमाएं श्रद्धालुओं द्वारा सहर्ष स्वीकार की जाएंगी।
बाजार में चहल-पहल
साकची, बिष्टुपुर, जुगसलाई और बागबेड़ा जैसे इलाकों में मूर्तियों की प्रदर्शनियां सज गई हैं। श्रद्धालु अपनी पसंद और श्रद्धा के अनुसार मां शारदे के विभिन्न स्वरूपों (वीणावादिनी, हंसवाहिनी) का चयन कर रहे हैं।
