
जमशेदपुर: सोनारी स्थित भारत सेवाश्रम संघ परिसर में युग-आचार्य स्वामी प्रणवानंदजी महाराज की 131वीं जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित तीन दिवसीय ‘श्रीश्री त्रिशूल उत्सव’ का रविवार को श्रद्धा और उल्लास के साथ समापन हो गया। आध्यात्मिक वातावरण और सेवा भाव के बीच संपन्न हुए इस उत्सव में शहर के हजारों नागरिकों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
विश्व शांति के लिए आहुति और भजन-कीर्तन
उत्सव के अंतिम दिन की शुरुआत रविवार सुबह दिव्य भजन-कीर्तन के साथ हुई। भक्ति संगीत के बीच विशेष अनुष्ठान किए गए, जिसके पश्चात ‘विश्व शांति हवन’ का आयोजन हुआ। संघ के स्वामियों और पुरोहितों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ आहुतियां दीं और मानवता के कल्याण व विश्व शांति की प्रार्थना की।
अन्नकूट महाभोग: 5000 से अधिक लोगों ने पाया प्रसाद
त्रिशूल उत्सव का मुख्य आकर्षण ‘अन्नकूट महाभोग’ रहा। दोपहर 12 बजे अन्नकूट पूजा संपन्न होने के बाद महाप्रसाद वितरण का शुभारंभ हुआ। संघ के स्वामियों और गणमान्य अतिथियों द्वारा पूजा की औपचारिकताओं के बाद आम श्रद्धालुओं के लिए कपाट खोल दिए गए।दोपहर से शुरू हुआ यह वितरण कार्यक्रम देर शाम तक अनवरत जारी रहा।प्रबंधन के अनुसार, 5000 से अधिक श्रद्धालुओं ने अनुशासन के साथ कतारबद्ध होकर महाभोग ग्रहण किया।
स्वामी प्रणवानंदजी महाराज के आदर्शों का स्मरण
इस तीन दिवसीय उत्सव के दौरान भारत सेवाश्रम संघ के संस्थापक स्वामी प्रणवानंदजी महाराज के जीवन और उनके द्वारा बताए गए सेवा, त्याग और संयम के मार्ग पर चर्चा की गई। श्रद्धालुओं ने न केवल धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया, बल्कि संघ द्वारा चलाए जा रहे सेवा कार्यों की भी सराहना की।
सुव्यवस्थित आयोजन
कार्यक्रम को सफल बनाने में भारत सेवाश्रम संघ, सोनारी शाखा के स्वामियों, स्वयंसेवकों और स्थानीय भक्तों की टीम ने सक्रिय भूमिका निभाई। भीड़ को देखते हुए सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए थे, ताकि हर श्रद्धालु सुगमता से दर्शन और प्रसाद प्राप्त कर सके।
