
जमशेदपुर: बहुचर्चित और हाई-प्रोफाइल कैरव गांधी अपहरण मामले में पुलिस को एक निर्णायक सफलता हाथ लगी है। जिला पुलिस ने अपनी रणनीतिक चतुराई और धैर्य का परिचय देते हुए न केवल कैरव को सुरक्षित मुक्त कराने की दिशा में कदम बढ़ाए, बल्कि इस कांड में शामिल तीन मुख्य अपहरणकर्ताओं को भी दबोच लिया है। पुलिस ने वारदात में इस्तेमाल की गई एक चार पहिया वाहन को भी जब्त किया है।
बिना फिरौती दिए अपराधियों का शिकार
इस पूरे ऑपरेशन की सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि अपहरणकर्ताओं द्वारा मांगी गई फिरौती की एक भी पाई नहीं दी गई। पुलिस ने अपराधियों पर चौतरफा दबाव बनाया कि वे खुद को घिरा हुआ महसूस करने लगे। सूत्रों के अनुसार, तकनीकी निगरानी और खुफिया तंत्र की मदद से पुलिस ने अपराधियों के नेटवर्क को एक-एक कर ध्वस्त कर दिया।
गोपनीयता बनी सफलता की कुंजी
जांच के दौरान पुलिस ने ‘जीरो लीक’ नीति अपनाई। केस से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी को पूरी तरह गोपनीय रखा गया, ताकि अपराधियों को भागने का या सचेत होने का कोई मौका न मिले। पुलिस की यह ‘साइलेंट स्ट्राइक’ रणनीति पूरी तरह सफल रही और अपराधी पुलिस के बिछाए जाल में फंसते चले गए।
अगले 48 घंटों में बड़े खुलासे की उम्मीद
फिलहाल गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपियों से पुलिस किसी गुप्त स्थान पर कड़ी पूछताछ कर रही है। पुलिस अधिकारियों का दावा है कि अगले 48 घंटों के भीतर इस पूरे मामले का औपचारिक पर्दाफाश किया जाएगा। सूत्रों का कहना है कि पूछताछ में कुछ चौंकाने वाले नाम सामने आ सकते हैं, जिससे यह पता चलेगा कि इस साजिश के पीछे और कौन-कौन से चेहरे छिपे थे।
अपराधियों को सख्त संदेश
इस सफल ऑपरेशन पर प्रतिक्रिया देते हुए पुलिस अधिकारियों ने कहा कि यह कार्रवाई अपराधियों के लिए एक सीधा संदेश है— “कानून के हाथ लंबे हैं और रणनीति से बचना अब नामुमकिन है।” सही समय पर की गई तकनीकी ट्रैकिंग और जमीनी इनपुट के तालमेल ने इस संवेदनशील केस को सुलझाने में बड़ी भूमिका निभाई।
