
रांची/दिल्ली: झारखंड की सियासत में आज का दिन निर्णायक साबित हो सकता है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के दावोस और लंदन के सफल दौरे से रांची लौटते ही राज्य में मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल की चर्चाएं तेज हो गई हैं। एक तरफ जहाँ मुख्यमंत्री अपनी विदेश यात्रा को झारखंड के विकास के लिए ‘ऐतिहासिक’ बता रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ सत्ताधारी गठबंधन के प्रमुख घटक दल कांग्रेस के भीतर मचे घमासान ने सरकार की धड़कनें बढ़ा दी हैं।
मुख्यमंत्री की वापसी और ‘मिशन कैबिनेट’
मंगलवार शाम रांची एयरपोर्ट पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनकी पत्नी कल्पना सोरेन का भव्य स्वागत किया गया। दावोस में निवेश की संभावनाओं और लंदन में प्रवासी झारखंडियों के साथ संवाद के बाद सीएम ने कहा कि वैश्विक मंच पर झारखंड की उपस्थिति से विकास के नए द्वार खुलेंगे। हालांकि, एयरपोर्ट पर उनकी चुप्पी और सीधे काम पर लौटने के अंदाज को राजनीतिक जानकार किसी बड़े बदलाव का संकेत मान रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, सीएम जल्द ही कैबिनेट के खाली पदों को भरने और गैर-निष्पादित मंत्रियों की छुट्टी करने पर फैसला ले सकते हैं।
दिल्ली में कांग्रेस का ‘शक्ति परीक्षण’: खड़गे के आवास पर मंथन
झारखंड कांग्रेस में असंतोष की आग अब दिल्ली दरबार तक पहुँच चुकी है। आज कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर एक महत्वपूर्ण बैठक प्रस्तावित है, जिसमें हाल ही में राजेश कच्छप, भूषण बाड़ा, नमन विक्सल कोंगाड़ी सहित 5 नाराज विधायकों ने दिल्ली में कैंप किया था। उनका आरोप है कि कांग्रेस कोटे के चारों मंत्री विधायकों की बात नहीं सुनते और केवल अपनी मनमानी करते हैं।आलाकमान आज कांग्रेस कोटे के वर्तमान मंत्रियों से उनके कार्यकाल का रिपोर्ट कार्ड मांग सकता है।नाराज गुट का साफ कहना है कि आगामी चुनौतियों को देखते हुए नए और सक्रिय चेहरों को कैबिनेट में जगह मिलनी चाहिए।
किन मंत्रियों पर गिर सकती है गाज?
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि कांग्रेस कोटे के उन मंत्रियों को हटाया जा सकता है जिनके खिलाफ विधायकों ने मोर्चा खोला है। इसके अलावा, झामुमो कोटे से भी क्षेत्रीय संतुलन (संताल परगना और कोल्हान) साधने के लिए नए चेहरों को शामिल किया जा सकता है। राजद कोटे के मंत्री संजय यादव के भविष्य पर भी संशय बना हुआ है, विशेषकर बिहार चुनाव के बाद बदले समीकरणों के मद्देनजर।
राजनीतिक विश्लेषकों की राय
विशेषज्ञों का मानना है कि हेमंत सोरेन की चुप्पी और कांग्रेस की दिल्ली बैठक इस बात की तस्दीक करती है कि राज्य में ‘सब कुछ ठीक नहीं’ है। यदि कांग्रेस अपने मंत्रियों को बदलती है, तो झामुमो पर भी अपने कोटे में फेरबदल का दबाव बढ़ेगा। यह विस्तार केवल विभागों का बंटवारा नहीं, बल्कि आगामी चुनावों के लिए सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरणों को दुरुस्त करने की एक कवायद होगी।
