
जमशेदपुर: झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने राज्य के शैक्षणिक परिदृश्य को लेकर एक नई सोच साझा की है। गुरुवार को जमशेदपुर के आरवीएस इंजीनियरिंग कॉलेज में आयोजित छठे दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए उन्होंने कहा कि हमें झारखंड को एक ऐसे ‘एजुकेशन हब’ के रूप में विकसित करना होगा, जहाँ देशभर के छात्र खिंचे चले आएं।
“बाहर के नौजवानों को आकर्षित करे झारखंड”
राज्यपाल ने अपने संबोधन में एक महत्वपूर्ण बिंदु की ओर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा आज यह चिंता का विषय है कि बाहर के नौजवान हमारे राज्य में पढ़ाई के लिए बहुत कम आते हैं। हमें इस ओर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। हमारी कोशिश होनी चाहिए कि हम शिक्षा के क्षेत्र में अपनी एक अलग और विशिष्ट पहचान बनाएं।
उन्होंने आरवीएस संस्थान के प्रबंधन से भी आग्रह किया कि वे अपनी गुणवत्ता को इस स्तर पर ले जाएं कि देश और विदेश के लोग यह समझें कि यहाँ से शिक्षा प्राप्त करने के बाद भविष्य की संभावनाएं असीमित हैं।
कंप्यूटर साइंस और तकनीक के नए रुझानों पर मंथन
यह अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘कंप्यूटर साइंस और तकनीक के क्षेत्र में अद्यतन रुझान’ विषय पर आयोजित किया गया है। राज्यपाल ने कहा कि आधुनिक तकनीक के इस दौर में नवाचार और शोध ही विकास की असली कुंजी है।
जमशेदपुर: केवल उद्योग नहीं, नैतिक मूल्यों की मिसाल
लौहनगरी की तारीफ करते हुए राज्यपाल ने कहा कि जमशेदपुर की पहचान केवल चिमनियों और कारखानों से नहीं है। उन्होंने कहा जेएन टाटा ने जिस दूरदर्शी औद्योगिक सोच और नैतिक मूल्यों की नींव रखी थी, वह आज भी मिसाल है।उद्योग को लाभ के बजाय समाज सेवा और राष्ट्र निर्माण का माध्यम मानना ही जमशेदपुर की असली गौरवशाली परंपरा है।
विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति
कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय स्तर के शिक्षाविदों ने भी अपने विचार साझा किए जिसमे प्रो. डॉक्टर वेदराज केसी (कुलपति, पोखरा विश्वविद्यालय, नेपाल) ने कहा कि नेपाल और भारत के बीच शैक्षणिक सहयोग और तकनीकी विनिमय की संभावनाओं पर जोर दिया जाए। भरत सिंह (सचिव, आरवीएस कॉलेज)ने कॉलेज की उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं से राज्यपाल को अवगत कराया।डॉ. राजेश कुमार तिवारी (प्राचार्य) ने सभी अतिथियों का स्वागत किया और सम्मेलन के तकनीकी सत्रों की जानकारी दी।
सम्मान और स्मृति चिह्न
समारोह के दौरान कॉलेज की अध्यक्ष वृंदा सिंह ने राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार को शॉल ओढ़ाकर और स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया। दो दिवसीय इस सम्मेलन में विभिन्न राज्यों के शोधार्थी अपने शोध पत्र प्रस्तुत करेंगे, जो कंप्यूटर विज्ञान के भविष्य की दिशा तय करेंगे।
