EMSI-2026: जमशेदपुर में जुटे दुनियाभर के वैज्ञानिक; कैंसर रिसर्च और नैनो-टॉक्सिकोलॉजी पर हुआ मंथन, छऊ नृत्य ने मोहा मन

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जमशेदपुर: जमशेदपुर को-ऑपरेटिव कॉलेज में आयोजित EMSI-2026 के 48वें वार्षिक अधिवेशन एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का दूसरा दिन शुक्रवार को वैज्ञानिक नवाचारों और गंभीर अकादमिक विमर्श के नाम रहा। स्वामी विवेकानंद सम्मेलन कक्ष और पुस्तकालय कक्ष में आयोजित विभिन्न तकनीकी सत्रों में देश-विदेश के वैज्ञानिकों ने कैंसर चिकित्सा, पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य से जुड़े अहम शोध साझा किए।

तकनीकी सत्र: पर्यावरण से लेकर कैंसर चिकित्सा तक पर चर्चा

सम्मेलन के दूसरे दिन कुल आठ तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। इन सत्रों में पर्यावरणीय उत्परिवर्तक , एपिजेनेटिक्स, पोषण विज्ञान, कैंसर जोखिम और नैनो-विषविज्ञान जैसे विषयों पर गहन चर्चा हुई।मुख्य व्याख्यान डॉ. ब्रिजालक्ष्मी दास ने निम्न-स्तरीय विकिरण के जैविक प्रभावों पर रोशनी डाली, जबकि डॉ. टी. मरियप्पन ने सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरणीय जोखिमों के संबंधों को स्पष्ट किया। नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय की डॉ. विभा पांडेय ने पर्यावरण संरक्षण के लिए ‘जैविक कीटनाशकों’ को रासायनिक विकल्पों के सर्वोत्तम विकल्प के रूप में अपनाने की बात कही।प्रमुख शोधकर्ता डॉ. ब्रिजालक्ष्मी दास, डॉ. बानी बंधना गांगुली, डॉ. सुतापा मुखर्जी और डॉ. आलोक कुमार पांडेय सहित कई विशेषज्ञों ने आनुवंशिकी और जीनोमिक अनुसंधान के निष्कर्ष प्रस्तुत किए।

एक नजर में सम्मेलन की उपलब्धियां (दूसरा दिन)

दूसरे दिन की शैक्षणिक गतिविधियों का संचालन डॉ. अमर कुमार, डॉ. स्वाति वत्स और डॉ. किरण दुबे सहित अन्य शिक्षकों ने किया जिसमे प्लेनरी व्याख्यान: 02,आमंत्रित व्याख्यान : 28,मौखिक प्रस्तुतियां : लगभग 50 और पोस्टर प्रस्तुतियां: 50 (पी.जी. ब्लॉक एवं प्रशासनिक भवन गैलरी में प्रदर्शित) की गई।

सांस्कृतिक संध्या: ‘छऊ’ और ‘हो’ नृत्य ने बिखेरी झारखंड की छटा

गहन तकनीकी चर्चाओं के बाद संध्या काल में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिसका उद्देश्य प्रतिभागियों को मानसिक विश्राम देना और क्षेत्रीय संस्कृति से परिचित कराना था। नितिका पॉल द्वारा प्रस्तुत महाराष्ट्र के ‘लावणी’ नृत्य और भामरा सर के सुगम संगीत ने समां बांध दिया।कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण सरायकेला/पुरुलिया समूह का छऊ नृत्य रहा। लगभग एक घंटे की इस प्रस्तुति में मुखौटों और अद्भुत शारीरिक मुद्राओं के जरिए पौराणिक कथाओं को जीवंत किया गया। बी.एड. के विद्यार्थियों ने ‘हो नृत्य’ प्रस्तुत कर झारखंड की समृद्ध आदिवासी सांस्कृतिक विरासत, सामूहिकता और प्रकृति प्रेम का संदेश दिया।

इन वैज्ञानिकों ने सत्रों की अध्यक्षता की

सम्मेलन के दौरान डॉ. नंदजी कुमार, प्रो. के. रुद्रमा देवी, डॉ. सतीश एस. राघवन, डॉ. एम. प्रकाश हांडे, डॉ. देवाशीष रथ और डॉ. सत्यम पटनायक जैसे दिग्गज वैज्ञानिकों ने विभिन्न सत्रों की अध्यक्षता और सह-अध्यक्षता की।

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