
जमशेदपुर: संयुक्त ट्रेड यूनियन के आह्वान पर गुरुवार को बुलाई गई देशव्यापी हड़ताल का व्यापक असर लौहनगरी जमशेदपुर में देखने को मिला। केंद्र सरकार की कथित ‘मजदूर विरोधी’ और ‘कॉरपोरेट समर्थक’ नीतियों के खिलाफ विभिन्न यूनियनों के सदस्यों ने एकजुट होकर विरोध प्रदर्शन किया।
800 से अधिक मेडिकल और सेल्स रिप्रेजेंटेटिव हड़ताल पर
इस हड़ताल का सबसे बड़ा प्रभाव दवा और बिक्री क्षेत्र में देखा गया। शहर के करीब 800 मेडिकल और सेल्स रिप्रेजेंटेटिव एकदिवसीय कार्य बहिष्कार पर रहे। सुबह से ही प्रदर्शनकारी उपायुक्त कार्यालय के समक्ष जुटने लगे और गेट पर धरना दिया। विरोध की तीव्रता को देखते हुए प्रदर्शनकारियों ने कुछ समय के लिए मुख्य सड़क को जाम कर दिया, जिससे यातायात बाधित हुआ।
नए लेबर कोड और 29 श्रम कानूनों को खत्म करने का विरोध
यूनियन नेताओं ने केंद्र सरकार पर मजदूरों के संवैधानिक अधिकारों को छीनने का आरोप लगाया। प्रदर्शन के दौरान मुख्य रूप से इन बिंदुओं पर आक्रोश व्यक्त किया गया।29 पुराने श्रम कानूनों को समाप्त कर चार नए लेबर कोड लागू करने का कड़ा विरोध किया गया। यूनियन का कहना है कि इससे मजदूरों के अधिकार कमजोर हुए हैं।नेताओं ने चिंता जताई कि ‘सेल्स प्रमोशन एम्प्लॉइज एक्ट 1976’ को खत्म कर दिया गया है, जो मेडिकल और सेल्स रिप्रेजेंटेटिव के हितों की रक्षा करने वाला एकमात्र विशेष कानून था। नए कोड के तहत फिक्स्ड टर्म रोजगार (अनुबंध) को बढ़ावा देने और न्यूनतम मजदूरी व कार्य समय के नियमों में ढील देने का आरोप लगाया गया।
कंपनियों की कार्यप्रणाली पर सरकारी निगरानी की मांग
धरना प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि कॉरपोरेट कंपनियां अपनी मनमर्जी से टारगेट तय कर रही हैं, जिससे कर्मचारियों पर मानसिक और शारीरिक दबाव बढ़ रहा है। यूनियन ने मांग की कि सरकार कंपनियों के टारगेट और कार्यप्रणाली की निगरानी के लिए एक प्रभावी तंत्र विकसित करे।
“केंद्र सरकार की नीतियां केवल बड़े पूंजीपतियों को लाभ पहुँचाने के लिए हैं। 29 श्रम कानूनों को बदलकर जो लेबर कोड लाए गए हैं, वे मजदूरों को गुलामी की ओर धकेलने वाले हैं। हमारी लड़ाई हक और इंसाफ मिलने तक जारी रहेगी।” — अम्बुज ठाकुर, प्रदेश सचिव, एआईटक
