
देवघर: विश्व प्रसिद्ध द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक, बाबा बैद्यनाथ मंदिर में महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा है। सुबह से ही मंदिर के पट आम श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए हैं। मंदिर प्रबंधन के अनुसार, इस वर्ष डेढ़ लाख से अधिक श्रद्धालु बाबा भोलेनाथ पर जलार्पण करेंगे।
भव्य विद्युत सज्जा और अभूतपूर्व सुरक्षा
इस बार महाशिवरात्रि के मौके पर मंदिर परिसर और पूरी शिवनगरी को भव्य विद्युत साज-सज्जा से सजाया गया है। रंग-बिरंगी लाइटों और फूलों की सुगंध से पूरा इलाका दिव्य नजर आ रहा है। जिला प्रशासन और मंदिर प्रबंधन ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुख्ता इंतजाम किए हैं, ताकि श्रद्धालु सुगमता से दर्शन कर सकें।
देवघर की अनूठी परंपरा: शिव-पार्वती विवाह उत्सव
देवघर में महाशिवरात्रि का पर्व अन्य स्थानों से काफी अलग और खास होता है। यहाँ इस दिन को भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती के विवाह उत्सव के रूप में मनाया जाता है।
- चार प्रहर की पूजा: रात भर चलने वाली इस विशेष पूजा में चार प्रहर के अनुष्ठान संपन्न होते हैं।
- वैवाहिक रस्में: पूरे रीति-रिवाज के साथ विवाह का कार्यक्रम आयोजित होता है।
- सिंदूर दान की रस्म: इस उत्सव की सबसे खास बात ‘सिंदूर दान’ की परंपरा है, जो केवल बैद्यनाथ धाम में ही देखी जाती है।
श्रद्धालुओं की लंबी कतारें
तड़के सुबह से ही श्रद्धालु कतारबद्ध होकर अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। मंदिर के गर्भ गृह में जलार्पण के लिए प्रशासन द्वारा रूट चार्ट निर्धारित किया गया है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पेयजल और चिकित्सा सहायता केंद्र भी जगह-जगह स्थापित किए गए हैं।
