
जमशेदपुर: अरका जैन विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ फार्मेसी द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन ‘फार्माटेक 2.0’ का 21 फरवरी को शानदार शुभारंभ हुआ। 21 और 22 फरवरी 2026 को आयोजित इस सम्मेलन का केंद्र बिंदु “शैक्षणिक संस्थानों में नवाचार की संस्कृति के निर्माण पर उद्योग की अंतर्दृष्टि” रखा गया है। यह आयोजन शिक्षा जगत और फार्मास्युटिकल उद्योग के बीच एक मजबूत सेतु बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
संस्कृति और भाषा का अद्भुत संगम
सम्मेलन की शुरुआत राष्ट्रगान और दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई। संयोगवश, इस दौरान ‘राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस’ भी मनाया गया, जिससे कार्यक्रम में भाषाई विविधता का गौरव झलका। विद्यार्थियों ने गणेश वंदना और सरस्वती वंदना के साथ-साथ केरल और आदिवासी नृत्यों की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं, जिसने ‘विविधता में एकता’ के भारतीय दर्शन को जीवंत कर दिया।
MoU और नई सदस्यता: विकास की नई राह
संस्थागत प्रगति को नई ऊंचाई देते हुए विश्वविद्यालय ने कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। विश्वविद्यालय ने इंडियन ड्रग मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन की एसोसिएट अकादमिक सदस्यता प्राप्त करने की घोषणा की।
दिग्गजों का मार्गदर्शन: नवाचार और बौद्धिक संपदा
डॉ. एलंगोवन करियाप्पन (सहायक नवाचार निदेशक, AICTE) ने वर्चुअल माध्यम से जुड़कर उन्होंने बौद्धिक संपदा और उद्यमिता को भविष्य की जरूरत बताया।डॉ. जॉर्ज पटानी (वरिष्ठ उपाध्यक्ष, IDMA) ने अनुसंधान एवं विकास (R&D) पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने पर बल दिया। झारखंड राज्य फार्मेसी परिषद के रजिस्ट्रार प्रशांत कुमार पांडे और PCI सदस्य धर्मेंद्र सिंह ने पेशेवर नैतिकता और राष्ट्रीय नीति के साथ शैक्षणिक नवाचार को जोड़ने की बात कही।
मॉडल निर्माण प्रतियोगिता और तकनीकी सत्र
सम्मेलन के तकनीकी सत्रों में फार्मास्युटिकल क्षेत्र के भविष्य पर गहन मंथन हुआ। छात्रों ने मॉडल निर्माण प्रतियोगिता के माध्यम से अपनी रचनात्मकता और व्यावहारिक कौशल का परिचय दिया। पहले दिन का समापन एक ऊर्जावान संगीत सत्र के साथ हुआ, जिसने इस शैक्षणिक समागम को एक उत्सव में बदल दिया।
