
जमशेदपुर :आधुनिकता और 21वीं सदी की शिक्षा के बावजूद, झारखंड का आदिवासी हो समाज आज भी अपनी सदियों पुरानी परंपराओं को संजोए हुए है। जमशेदपुर के ओल्ड उलीडीह क्षेत्र में रविवार को ‘बाहा पर्व’ के अवसर पर एक ऐसा ही अनोखा अनुष्ठान देखने को मिला, जहाँ दर्जनों बच्चों की प्रतीकात्मक शादी एक कुतिया से कराई गई।
क्या है यह परंपरा और मान्यता?
हो समाज में प्रचलित मान्यताओं के अनुसार, यदि किसी बच्चे का पहला दांत ऊपर की ओर निकलता है, तो इसे ‘अशुभ’ या ‘ग्रह दोष’ माना जाता है। समाज का मानना है कि इस दोष का प्रभाव बच्चे के भविष्य और उसके परिवार पर पड़ सकता है। इस कथित अशुभ प्रभाव को दूर करने के लिए बच्चों का विवाह कुतिया से कराया जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कोई वास्तविक विवाह नहीं, बल्कि एक धार्मिक और प्रतीकात्मक अनुष्ठान है ताकि बच्चे का जीवन मंगलमय हो सके।
बाहा पर्व और उत्सव का माहौल
यह अनुष्ठान प्रकृति पर्व ‘बाहा’ के दौरान आयोजित किया गया, जो नवजीवन और सामुदायिक एकता का प्रतीक है। ओल्ड उलीडीह में इस दौरान उत्सव जैसा माहौल रहा जिसमें बच्चे रंग-बिरंगे पारंपरिक कपड़ों में सज-धज कर तैयार हुए।पूरे अनुष्ठान के दौरान ढोल-नगाड़े बजते रहे और सामुदायिक नृत्य का आयोजन हुआ। बुजुर्गों ने इस रस्म को सामाजिक दायित्व बताया और इसे पीढ़ियों से चली आ रही धरोहर करार दिया।
आस्था बनाम अंधविश्वास: एक बड़ी बहस
इस परंपरा ने एक बार फिर आस्था और अंधविश्वास के बीच की धुंधली रेखा पर बहस छेड़ दी है।समाज के प्रबुद्ध वर्ग का तर्क है कि यह उनकी सांस्कृतिक पहचान और सामुदायिक विश्वास का हिस्सा है, जो उन्हें उनकी जड़ों से जोड़ता है।वहीं, शिक्षाविदों और चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि ऊपरी दांत का पहले निकलना एक सामान्य जैविक प्रक्रिया है। इसका शुभ या अशुभ से कोई वैज्ञानिक संबंध नहीं है।
