जमशेदपुर : स्वतंत्रता सेनानी एवं ‘चुआड़ विद्रोह’ व भूमिज विद्रोह (1832-33) के महानायक वीर शहीद गंगा नारायण सिंह की जयंती के अवसर पर शनिवार, 25 अप्रैल को लौहनगरी के विष्टुपुर स्थित रीगल मैदान में एक विशाल सांस्कृतिक समागम और जनसभा का आयोजन किया जाएगा। सुबह 10 बजे से शुरू होने वाले इस कार्यक्रम को लेकर समाज में भारी उत्साह देखा जा रहा है।
पहली बार इतने बड़े स्तर पर आयोजन
आयोजन समिति के अनुसार, यह पहली बार है जब जयंती समारोह को इतने व्यापक और संगठित रूप में मनाया जा रहा है। इस भव्य आयोजन का मुख्य उद्देश्य युवा पीढ़ी को उनके पूर्वजों के बलिदान और अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ किए गए संघर्षों से अवगत कराना है। वीर गंगा नारायण सिंह ने आदिवासियों के जल-जंगल-जमीन और स्वाभिमान की रक्षा के लिए अंग्रेजों की नाक में दम कर दिया था।
कार्यक्रम की विस्तृत रूपरेखा
आयोजकों ने कार्यक्रम को कई चरणों में विभाजित किया है ताकि वैचारिक और सांस्कृतिक दोनों पहलुओं को समान महत्व मिल सके
पूजा-अर्चना व माल्यार्पण: सुबह 11:00 से दोपहर 12:00 बजे तक।
संबोधन: दोपहर 12:00 से 1:00 बजे तक समाज के प्रमुख पदाधिकारियों का भाषण।
सम्मान समारोह: दोपहर 1:00 से 2:00 बजे तक समाज के लिए उत्कृष्ट कार्य करने वालों को प्रमाण पत्र वितरण।
विचार गोष्ठी: दोपहर 2:00 से 3:00 बजे तक (शहीद के जीवन दर्शन पर चर्चा)।
सांस्कृतिक समागम: दोपहर 3:00 से शाम 4:00 बजे तक पारंपरिक नृत्य व संगीत।
बुद्धिजीवी अभिभाषण: शाम 4:00 से 5:30 बजे तक।
समाज के सभी वर्गों से जुड़ने की अपील
आयोजन समिति ने शहर और आसपास के क्षेत्रों के बुद्धिजीवियों, महिलाओं, युवाओं और आम नागरिकों से इस जनसभा में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की है। कार्यक्रम में स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ-साथ समाज के विभिन्न संगठनों की भागीदारी भी सुनिश्चित की गई है।
वीर शहीद गंगा नारायण सिंह का योगदान
इतिहासकारों के अनुसार, गंगा नारायण सिंह ने ब्रिटिश साम्राज्यवाद के खिलाफ उस समय विद्रोह का झंडा बुलंद किया था जब अंग्रेजों ने स्थानीय प्रशासन और कर प्रणाली में हस्तक्षेप शुरू किया था। उनके इस आंदोलन को ‘गंगा नारायण का हंगामा’ भी कहा जाता है, जो भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की एक महत्वपूर्ण कड़ी है।
