जमशेदपुर: एमजीएम अस्पताल में इलाज कराने आने वाले मरीजों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। अस्पताल के नए और पुराने भवनों में लगी लिफ्ट की खराबी के कारण मरीजों को सीढ़ियों से ऊपर के तल्लों तक ले जाने को मजबूर होना पड़ रहा है।
8 में से अधिकांश लिफ्ट बीमार
अस्पताल परिसर में आम जनता की सुविधा के लिए कुल 8 लिफ्ट स्थापित की गई हैं, लेकिन वर्तमान स्थिति बेहद दयनीय है। दो लिफ्ट पिछले कई दिनों से पूरी तरह खराब पड़ी हैं।जो लिफ्ट चल रही हैं, उनमें भी गंभीर तकनीकी समस्याएं हैं। कई बार लिफ्ट चौथे तल्ले या विशिष्ट वार्ड वाले फ्लोर पर नहीं रुकती, जिससे मरीजों को बीच रास्ते में उतरकर सीढ़ियों का सहारा लेना पड़ता है।अस्पताल की किसी भी लिफ्ट में ‘लिफ्ट मैन’ तैनात नहीं है। ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले मरीज और उनके परिजन लिफ्ट ऑपरेट करना नहीं जानते, जिससे उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
टेंडर खत्म होने से अटका काम
मिली जानकारी के अनुसार, लिफ्ट की इस दुर्दशा के पीछे प्रशासनिक पेच फंसा हुआ है।अस्पताल का रखरखाव देखने वाली भवन निर्माण कंपनी का टेंडर समाप्त हो गया है।जब तक नई कंपनी को टेंडर आवंटित नहीं होता, तब तक लिफ्ट की मरम्मत और मैनपावर की बहाली मुश्किल लग रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि तब तक गंभीर स्थिति वाले मरीज वार्डों तक कैसे पहुंचेंगे?
अधीक्षक का आश्वासन
इस पूरे मामले पर एमजीएम अस्पताल के अधीक्षक डॉ. बलराम झा ने कहा कि समस्याओं की जानकारी विभाग को दे दी गई है। उन्होंने आश्वासन दिया कि विभाग को इस संबंध में सूचित किया जा चुका है और जल्द ही लिफ्ट की मरम्मत कराकर स्थिति को सामान्य कर लिया जाएगा।
मरीजों की व्यथा
अस्पताल में आने वाले बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए सीढ़ियां चढ़ना लगभग असंभव है। कई बार स्ट्रेचर पर ले जाने वाले मरीजों को भी वार्ड बॉय और परिजन मिलकर सीढ़ियों से ले जाते हैं, जो जानलेवा साबित हो सकता है।
