जमशेदपुर:वन्यजीवों की सुरक्षा और शिकार परब की रोकथाम के लिए वन विभाग द्वारा चलाए जा रहे जागरूकता अभियान ने अब आंदोलन का रूप ले लिया है। डीएफओ सबा आलम अंसारी के निर्देशानुसार, दलमा वन्यजीव क्षेत्र के गांवों में गीता थिएटर के कलाकारों द्वारा “माटी की पुकार” (जंगल है तो हम हैं) नाटक के जरिए ग्रामीणों को जागरूक किया जा रहा है।
पटमदा के बेलटांड़ चौक पर भव्य आयोजन
इसी क्रम में पटमदा के बेलटांड़ चौक पर एक प्रभावशाली कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस मौके पर मुख्य अतिथि के रूप में पटमदा के अंचलाधिकारी डॉ. राजेंद्र कुमार दास, थाना प्रभारी विष्णुचरण भोगता और समाजसेवी विश्वनाथ महतो उपस्थित रहे।प्रमुख संबोधन डॉ. राजेंद्र कुमार दास ने कलाकारों के जीवंत अभिनय की सराहना करते हुए कहा कि प्रकृति और जीव-जंतुओं के बिना मानव जीवन का अस्तित्व संभव नहीं है।विष्णुचरण भोगता (थाना प्रभारी) ने ग्रामीणों को चेतावनी देते हुए स्पष्ट किया कि शिकार परब के नाम पर वन्यजीवों का अवैध शिकार कानूनन अपराध है और पकड़े जाने पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।विश्वनाथ महतो (समाजसेवी) ने पारंपरिक प्रथाओं में समय के साथ सकारात्मक बदलाव की आवश्यकता पर बल दिया।
20 अप्रैल से जारी है ‘युद्धस्तरीय’ अभियान
अभियान की शुरुआत 20 अप्रैल को मानगो वन विभाग के सभागार से हुई थी। इसके बाद 22 अप्रैल से लगातार नाट्य दल गांवों का भ्रमण कर रहा है। कलाकार पहले गीत-संगीत के माध्यम से भीड़ जुटाते हैं, फिर प्रभावशाली नाटक पेश करते हैं। कार्यक्रम के अंत में सभी ग्रामीणों को सामूहिक वन्यजीव संरक्षण शपथ दिलाई जाती है।अभियान का नेतृत्व वन विभाग के वन्यजीव जीवविज्ञानी प्रसेनजीत सरकार और व्यक्तित्व विकास संस्था के आकाश कुमार जयसवाल कर रहे हैं।
मंच पर दिखे ये कलाकार
नुक्कड़ नाटक में कलाकारों ने अपनी सशक्त भूमिकाओं से ग्रामीणों का दिल जीत लिया।गीता कुमारी (वन देवी), प्रेम दीक्षित (वन्यजीव सुरक्षा मित्र), अभिषेक राजू (शिकारी दल प्रमुख), आकाश साव (युवा शिकारी), मनोज कुमार (ग्राम प्रधान), और करण साव ने वन्यजीव की भूमिका निभाई। इसके अलावा सोनू, चंपा और छोटू ने ग्रामीणों के पात्र जीवंत किए।
