जमशेदपुर: अगर आपने भी बैंक या किसी प्राइवेट फाइनेंस कंपनी से लोन पर कार, बाइक या कमर्शियल वाहन लिया है और किसी कारणवश आपकी किस्तें टूट गई हैं, तो यह खबर आपके लिए ढाल का काम करेगी। जमशेदपुर के एएसपी ऋषभ त्रिवेदी ने वाहन मालिकों को उनके कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक करते हुए स्पष्ट किया है कि फाइनेंस कंपनियों द्वारा बाहुबलियों (रिकवरी एजेंटों) के दम पर बलपूर्वक वाहन जब्त करना कानूनन अपराध है।एएसपी ने चेतावनी दी है कि शहर में मनमानी करने वाली ऐसी लोन प्रदाता कंपनियों और उनके रिकवरी सिंडिकेट के खिलाफ जल्द ही जिला पुलिस विशेष छापामारी अभियान शुरू करने जा रही है।
जानकारी के अभाव में मानसिक प्रताड़ना झेलते हैं वाहन मालिक
एएसपी ने बताया कि लोग अपनी जरूरत के अनुसार आनन-फानन में फाइनेंस कंपनियों से लोन ले लेते हैं। लेकिन व्यापार में घाटा, नौकरी छूटने या किसी पारिवारिक संकट के कारण जब कुछ महीनों की किस्तें जमा नहीं हो पाती हैं, तो कंपनियां नियम-कानून को ताक पर रखकर रिकवरी एजेंटों को पीछे लगा देती हैं।”ये एजेंट बीच सड़क पर चलते वाहन को जबरन रोकते हैं, चाबी छीनते हैं और गाली-गलौज व मारपीट कर गाड़ी ले भागते हैं। जानकारी न होने के कारण वाहन मालिक लोक-लाज के डर से मानसिक प्रताड़ना का शिकार हो जाता है और अपनी संपत्ति खो बैठता है। जबकि न्यायालय के अनुसार यह पूरी तरह डकैती और जबरन वसूली की श्रेणी का अपराध है।”
न्यायालय के अनुसार: केवल इन 3 तरीकों से ही हो सकती है वाहन जब्ती
माननीय न्यायालय और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के दिशा-निर्देशों के अनुसार, कोई भी बैंक या वित्तीय संस्थान केवल तीन कानूनी प्रक्रियाओं के तहत ही डिफॉल्टर का वाहन कब्जे में ले सकता है
रिकवरी सूट दायर कर
फाइनेंस कंपनी न्यायालय में रिकवरी सूट दायर कर प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में वाहन जब्त कर सकती है।
सर्फेसी एक्ट के तहत
सर्फेसी एक्ट के तहत कार्यपालक दंडाधिकारी को आवेदन देकर उनके निर्देश पर वाहन जब्त किया जा सकता है।
वाहन मालिक द्वारा स्वेच्छा से सरेंडर
यदि वाहन मालिक स्वयं वाहन सरेंडर कर दे, तभी कंपनी वाहन ले सकती है।
इसके अलावा चौथा कोई भी तरीका (जैसे बीच सड़क से गाड़ी उठाना, घर के बाहर से लॉक तोड़ना या डराना-धमकाना) पूरी तरह गैर-कानूनी और संज्ञेय अपराध है।
पीड़ित ग्राहक क्या करें? एएसपी ने दिए दो अचूक उपाय
एएसपी ऋषभ त्रिवेदी ने लौहनगरी और आस-पास के वाहन मालिकों से अपील की है कि यदि कोई भी रिकवरी एजेंट आपके साथ बदतमीजी करता है या जबरन गाड़ी छीनने का प्रयास करता है, तो घबराएं नहीं, बल्कि ये कदम उठाएं। तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन या पीसीआर को फोन करें। पुलिस आपकी सुरक्षा करेगी और जबरन गाड़ी ले जाने वाले एजेंटों पर लूट की प्राथमिकी दर्ज करेगी। आप रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर संबंधित बैंक या फाइनेंस कंपनी के खिलाफ बैंकिंग लोकपाल में शिकायत दर्ज करा सकते हैं। आरबीआई के कड़े नियमों के कारण ऐसी कंपनियों का लाइसेंस तक रद्द हो सकता है।
एजेंसियों की जांच करेगी पुलिस
एएसपी ने साफ लहजे में कहा है कि जमशेदपुर में कानून का राज चलेगा, किसी निजी कंपनी के बाहुबलियों का नहीं। पुलिस बहुत जल्द शहर में सक्रिय सभी फाइनेंस कंपनियों के रिकवरी दफ्तरों और उनके द्वारा रखे गए एजेंटों के क्रेडेंशियल की जांच के लिए छापामारी शुरू करेगी। बिना पुलिस को सूचना दिए या बिना अदालती आदेश के गाड़ी या यार्ड में जब्ती करने वाली हर एजेंसी पर कानूनी हंटर चलना तय है।
