चांडिल: एनएच-33 किनारे होटल वन पलासी में अचानक घुसा हिरण संचालक बोले– “विशु शिकार रुकने का दिख रहा सकारात्मक असर”

चांडिल : चांडिल वन प्रक्षेत्र के अंतर्गत हमसादा में उस वक्त एक अद्भुत और हैरान कर देने वाला नजारा देखने को मिला, जब राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे स्थित प्रसिद्ध होटल वन पलासी के परिसर में अचानक एक जंगली हिरण दौड़ते हुए अंदर घुस आया। घने जंगलों को छोड़कर इंसानी आबादी और गाड़ियों के शोरगुल के बीच अचानक हिरण को अपने इतने करीब देखकर होटल के कर्मचारियों और वहां ठहरे मेहमानों के बीच कुछ देर के लिए अफरा-तफरी मच गई और हलचल तेज हो गई।राहत की बात यह रही कि किसी भी अप्रिय स्थिति के बिना यह मासूम मेहमान सुरक्षित तरीके से वापस अपने प्राकृतिक वास की ओर लौट गया।

हाईवे पार कर गांव की ओर निकला हिरण, टला बड़ा हादसा

प्रत्यक्षदर्शियों और होटल के स्टाफ ने बताया कि हिरण काफी फुर्तीला था और वह ज्यादा देर तक होटल कैंपस में नहीं रुका। परिसर में कुछ देर तक इधर-उधर भटकने और चहलकदमी करने के बाद हिरण होटल के मुख्य गेट से बाहर निकल गया।वह सीधे तेज रफ्तार गाड़ियों के लिए जाने जाने वाले एनएच-33 की तरफ बढ़ा। हाईवे पार करते समय वहां मौजूद लोगों की सांसें अटक गईं, क्योंकि सड़क पर भारी और तेज रफ्तार वाहन दौड़ रहे थे। हालांकि, किस्मत अच्छी थी कि बिना किसी दुर्घटना के हिरण ने सुरक्षित रूप से नेशनल हाईवे पार कर लिया और सामने स्थित गांव की झाड़ियों की दिशा में ओझल हो गया।

“20 साल बाद दिखा ऐसा दृश्य, आंगन तक पहुंच रहे हिरण”— बुद्धेश्वर मार्डी

घटना के तुरंत बाद होटल संचालक ने इसकी आधिकारिक सूचना वन विभाग के स्थानीय अधिकारियों को दी, जिसके बाद वन विभाग की टीम भी क्षेत्र में वन्यजीव की सुरक्षा को लेकर अलर्ट मोड पर है।होटल वन पलासी के संचालक बुद्धेश्वर मार्डी ने इस घटना पर गहरी खुशी व्यक्त करते हुए इसे पर्यावरण के लिए एक बेहतरीन संकेत बताया “पिछले करीब 20 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद चांडिल और हमसादा क्षेत्र में ऐसा सुखद दृश्य देखने को मिला है। पहले इस तरह आबादी वाले क्षेत्रों या राष्ट्रीय राजमार्ग के इतने करीब हिरणों की मौजूदगी शून्य के बराबर थी। लेकिन अब हिरण जंगलों से निकलकर गांवों और घरों के आंगन तक पहुंच रहे हैं, जो यह साबित करता है कि हमारे जंगलों का पर्यावरण सुधर रहा है।”

‘विशु शिकार’ पर लगी रोक का दिखने लगा जमीनी असर

बुद्धेश्वर मार्डी ने इसके पीछे जनजातीय समाज में आई जागरूकता और पारंपरिक शिकार में आई कमी को सबसे बड़ा कारण बताया। उन्होंने कहा कि यह बेहद गर्व की बात है कि इस वर्ष विशु शिकार (सेंदरा पर्व के दौरान होने वाला पारंपरिक शिकार) जागरूक प्रयासों के कारण लगभग नहीं के बराबर हुआ। आदिवासियों और स्थानीय ग्रामीणों ने वन्यजीवों को मारने के बजाय उन्हें बचाने का संकल्प लिया, जिसका सीधा परिणाम आज देखने को मिल रहा है कि जानवर अब खुद को सुरक्षित महसूस कर रहे हैं और उनकी संख्या में वृद्धि हो रही है।

वन विभाग के प्रयासों की सराहना, लेकिन सुरक्षा को लेकर सतर्कता जरूरी

होटल संचालक ने वन्यजीव संरक्षण के लिए चलाए जा रहे अभियानों के लिए वन विभाग की पीठ थपथपाई, लेकिन साथ ही एक महत्वपूर्ण सुझाव भी दिया। उन्होंने कहा कि चूंकि अब जंगली जानवर भोजन और पानी की तलाश में या भटककर आबादी वाले क्षेत्रों की ओर रुख कर रहे हैं, इसलिए वन विभाग को गश्त और क्विक रिस्पांस टीम को और अधिक सक्रिय करना होगा। हाईवे के किनारे ‘वन्यजीव क्रॉसिंग’ के संकेतक बोर्ड लगाने की भी जरूरत है ताकि तेज रफ्तार वाहनों की चपेट में आकर इन बेजुबान जानवरों की जान न जाए और इंसानी सुरक्षा भी बनी रहे।

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