जमशेदपुर: झारखंड में मजदूरों, असंगठित कामगारों और औद्योगिक श्रमिकों के अधिकारों की आवाज बुलंद करने वाले प्रमुख संगठन ‘भारतीय राष्ट्रीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस’ फेडरेशन ने राज्य में अपने सांगठनिक ढांचे को नए सिरे से विस्तारित करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। संगठन के राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष शैतानसिंह सोलंकी के सीधे निर्देश पर झारखंड प्रदेश कमेटी में कई नई अस्थायी नियुक्तियों की आधिकारिक घोषणा की गई है।
इन नियुक्तियों को तत्काल प्रभाव से पूरे राज्य में लागू कर दिया गया है। राष्ट्रीय नेतृत्व का मानना है कि इस सांगठनिक विस्तार से कोयलांचल से लेकर लौहनगरी तक इंटक नए जोश के साथ मजदूरों के हक की लड़ाई लड़ेगा।
नियमित सांगठनिक चुनाव होने तक ‘तदर्थ व्यवस्था’ के तहत मिली जिम्मेदारी
इंटक मुख्यालय द्वारा जारी आधिकारिक पत्र के अनुसार, ये नियुक्तियां संगठन के सुचारू संचालन के लिए एक तात्कालिक व्यवस्था का हिस्सा हैं। संगठन की ओर से स्पष्ट किया गया है कि ये सभी नई नियुक्तियां नियमित और विधिवत संगठनात्मक चुनाव संपन्न होने तक ही अस्थायी रूप से प्रभावी रहेंगी।यह पूरी प्रक्रिया सक्षम केंद्रीय प्राधिकारी की अंतिम स्वीकृति और प्रदेश में होने वाली आगामी सांगठनिक बैठक या प्रांतीय सम्मेलन में पुष्टि के अधीन रखी गई है।
सक्षम प्राधिकारी के पास सुरक्षित रहेंगे अधिकार
संगठन की गरिमा, अनुशासन और कार्यक्षमता को बनाए रखने के लिए केंद्रीय नेतृत्व ने आदेश में कुछ महत्वपूर्ण शर्तें भी जोड़ी हैं। संगठन के व्यापक हित और नीतियों को ध्यान में रखते हुए सक्षम प्राधिकारी के पास यह अधिकार सुरक्षित रहेगा कि वह किसी भी समय, बिना पूर्व सूचना के किसी भी नियुक्ति में संशोधन, प्रतिस्थापन कर सकता है या उसे पूरी तरह वापस ले सकता है। इससे संगठन के भीतर अनुशासन बना रहेगा।
झारखंड के श्रमिक आंदोलनों को मिलेगी नई धार और ऊर्जा
झारखंड मूल रूप से खनन (माइनिंग) और भारी उद्योगों (टाटा, सेल, एचईसी) का गढ़ है, जहां ट्रेड यूनियनों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में नई कमेटी के गठन को लेकर राष्ट्रीय और प्रांतीय नेतृत्व बेहद आशान्वित है। इंटक के शीर्ष नेतृत्व ने उम्मीद जताई है कि नई ऊर्जावान नियुक्तियों से झारखंड के विभिन्न जिलों (जमशेदपुर, धनबाद, बोकारो, रांची) में संगठन का जनाधार और मजबूत होगा। बढ़ती महंगाई, छंटनी और ठेका मजदूरों के शोषण जैसे ज्वलंत मुद्दों के बीच यह नई टीम झारखंड में मजदूर आंदोलनों को संगठित कर उन्हें एक नई और प्रभावी दिशा देने का काम करेगी।आने वाले एक-दो दिनों के भीतर नव-नियुक्त पदाधिकारियों के नामों की विस्तृत सूची भी जिलावार जारी कर दिए जाने की संभावना है, जिस पर राज्य के श्रमिक नेताओं की नजरें टिकी हुई हैं।
