आदित्यपुर: आदित्यपुर क्षेत्र में सोमवार को एक बार फिर स्कूल परिवहन की लापरवाही सामने आई। सेंट्रल पब्लिक स्कूल का एक छात्र चलती टेम्पो से गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गया। हालांकि, समय रहते इलाज मिलने से एक बड़ा हादसा टल गया। घटना के बाद स्थानीय लोगों की मदद से छात्र को तुरंत मगध सम्राट हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया, जहाँ फिलहाल उसकी स्थिति खतरे से बाहर बताई गई है।
क्षमताओं से ज्यादा बच्चे, सुरक्षा ताक पर
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि जिस टेम्पो में यह हादसा हुआ, उसमें क्षमता से अधिक छात्र सवार थे। स्थिति यह थी कि कई बच्चे टेम्पो के किनारों पर लटककर सफर करने को मजबूर थे।पकड़ने के लिए पर्याप्त सहारा न होने के कारण संतुलन बनाना मुश्किल था।अचानक लगे झटके के कारण छात्र सड़क पर गिर गया और लहूलुहान हो गया।
भीषण गर्मी और ‘हीट वेव’ का असर
जानकारों का मानना है कि इस हादसे के पीछे भीषण गर्मी भी एक बड़ा कारण हो सकती है। लू और बढ़ते तापमान के कारण बच्चों में चक्कर आना और डिहाइड्रेशन की समस्या आम हो गई है। आशंका है कि छात्र को चक्कर आया होगा, जिससे उसका हाथ हैंडल से छूट गया। क्षेत्र के कई स्कूलों ने समय में बदलाव किया है, लेकिन कुछ स्कूलों द्वारा अब भी दोपहर की तपिश में संचालन जारी रखना सवालों के घेरे में है।
प्रशासनिक निगरानी पर सवाल
स्थानीय अभिभावकों ने स्कूल प्रबंधन और ट्रैफिक पुलिस के खिलाफ रोष व्यक्त किया है। लोगों का कहना है कि स्कूल वाहनों में ओवरलोडिंग की समस्या जगजाहिर है, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती।ट्रैफिक पुलिस द्वारा नियमित जांच का अभाव वाहन चालकों के हौसले बुलंद करता है।सुरक्षित परिवहन सुनिश्चित करना केवल अभिभावकों नहीं, बल्कि स्कूल प्रबंधन की भी नैतिक जिम्मेदारी है।
सुरक्षा के लिए आवश्यक सुझाव
इस घटना ने भविष्य के लिए कई बड़े सबक दिए हैं। दुर्घटनाओं को रोकने के लिए निम्नलिखित कदम उठाना अनिवार्य है।ट्रैफिक विभाग को स्कूली वाहनों की औचक जांच कर क्षमता से अधिक बच्चे बिठाने वालों के परमिट रद्द करने चाहिए।अभिभावकों को भी बच्चों को असुरक्षित तरीके से स्कूल भेजने से बचना होगा।फिलहाल छात्र का इलाज जारी है, लेकिन यह घटना प्रशासन और स्कूल संचालकों के लिए एक गंभीर चेतावनी है।
