जमशेदपुर : नीट पेपर लीक मामले को लेकर देशव्यापी आक्रोश के बीच सोमवार को लौहनगरी के साकची गोलचक्कर पर ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइजेशन के कार्यकर्ताओं और आम छात्रों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। परीक्षा प्रणाली में कथित धांधली और बार-बार हो रहे पेपर लीक के खिलाफ छात्रों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री का पुतला दहन किया और केंद्र सरकार व एनटीए के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
“2024 के दोषियों पर नरमी का नतीजा है दोबारा पेपर लीक”
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रही एआईडीएसओ की प्रदेश सचिव मंडली सदस्या सोनी सेनगुप्ता ने केंद्र सरकार और परीक्षा एजेंसियों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने उपस्थित छात्रों और मीडिया को संबोधित करते हुए कहा “देश में लगातार हो रही पेपर लीक की घटनाओं ने हमारी पूरी परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को मटियामेट कर दिया है। साल 2024 में भी जब पेपर लीक की बड़ी घटनाएं सामने आई थीं, तब सरकार ने दोषियों के खिलाफ कोई ठोस या ऐसी कठोर कार्रवाई नहीं की जो नजीर बन सके। उसी ढुलमुल रवैये और नरमी का नतीजा है कि आज दोबारा ऐसी गंभीर घटनाएं देश के लाखों होनहार छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही हैं।”
‘राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी’ को तत्काल भंग करने की मांग
प्रदर्शनकारी छात्रों ने देश में परीक्षाओं का आयोजन कराने वाली शीर्ष संस्था नेशनल टेस्टिंग एजेंसी की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाए। संगठन का कहना है कि एनटीए देश की सबसे संवेदनशील और बड़ी परीक्षाएं पूरी तरह निष्पक्ष, सुरक्षित और पारदर्शी तरीके से आयोजित करने में बार-बार नाकाम साबित हुई है।छात्रों ने मांग की कि ऐसी विफल और संवेदनहीन एजेंसी को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया जाना चाहिए।
शिक्षा के केंद्रीयकरण और निजीकरण पर रोक लगाने की अपील
सोनी सेनगुप्ता ने वर्तमान शिक्षा नीतियों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि शिक्षा का जिस तरह से ‘केंद्रीयकरण’ और ‘निजीकरण’ किया जा रहा है, वह बेहद आत्मघाती है। इसके कारण देश के गरीब, ग्रामीण और पिछड़े वर्ग से आने वाले मेधावी छात्रों के लिए उच्च शिक्षा और मेडिकल-इंजीनियरिंग जैसे संस्थानों तक पहुंचना दिन-ब-दिन नामुमकिन होता जा रहा है। पूरी व्यवस्था को पूंजीपतियों के हित में मोड़ा जा रहा है।
एआइडीएसओ की प्रमुख मांगें और उग्र आंदोलन की चेतावनी
साकची गोलचक्कर पर प्रदर्शन के बाद छात्र संगठन ने सरकार के समक्ष अपनी तीन मुख्य मांगें रखीं। नीट पेपर लीक मामले की किसी स्वतंत्र और निष्पक्ष न्यायिक निगरानी में पूरी तरह पारदर्शी व समयबद्ध जांच कराई जाए। इस पूरे रैकेट के पीछे छिपे मुख्य दोषियों और रसूखदारों को ऐसी कड़ी व उदाहरणात्मक सजा दी जाए जो मिसाल बने, साथ ही जांच रिपोर्ट को पूरी तरह सार्वजनिक किया जाए।भविष्य में बिना किसी धांधली के परीक्षा सुनिश्चित कराने के लिए एक पारदर्शी और सुरक्षित तंत्र का निर्माण हो।
