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जमशेदपुर : राहुल गांधी द्वारा उठाए जा रहे ‘वोट चोरी’ के आरोपों और विपक्षी आंदोलन पर सवाल उठाते हुए झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं ओडिशा के पूर्व राज्यपाल रघुवर दास ने कहा कि भारत में सत्ता परिवर्तन का फैसला जनता मतपत्र के जरिए करती है। उनके अनुसार, चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाना विपक्ष का अधिकार है, लेकिन ऐसे आरोपों के समर्थन में ठोस प्रमाण देना और संवैधानिक संस्थाओं के माध्यम से समाधान खोजना भी जरूरी है।रघुवर दास ने अपने विचार में कहा कि केवल नारों और आरोपों के आधार पर जनता का विश्वास नहीं जीता जा सकता। लोकतंत्र की मजबूती के लिए चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता, निष्पक्ष मतदाता सूची और प्रत्येक पात्र नागरिक के मतदान के अधिकार की रक्षा आवश्यक है।
बैलेट से ही होता है सत्ता का फैसला
रघुवर दास ने कहा कि भारत का इतिहास इस बात का गवाह है कि देश में सत्ता का फैसला जनता अपने मताधिकार से करती है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के शासन का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी सरकार का अंत भी चुनाव के माध्यम से हुआ था।उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को हिंसा और अराजकता के जरिए कमजोर करने की कोशिशों का विरोध होना चाहिए। उनके मुताबिक, नक्सलवाद और उग्रवादी हिंसा ने देश के कई क्षेत्रों में विकास और शांति के सामने गंभीर चुनौतियां खड़ी की हैं। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में नक्सलवाद के खिलाफ की गई कार्रवाई का भी उल्लेख किया।
आंदोलन के एजेंडे पर उठाए सवाल
रघुवर दास ने ‘तिलचट्टा’ आंदोलन का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि शिक्षा सुधार के नाम पर शुरू हुआ यह आंदोलन बाद में कांग्रेस और वामपंथी दलों के करीब पहुंच गया। उन्होंने आंदोलन के एजेंडे, फंडिंग और सोशल मीडिया पर उसके समर्थन में बढ़ती संख्या को लेकर सवाल उठाए।उन्होंने इसके पीछे विदेशी शक्तियों की साजिश होने का भी दावा किया। हालांकि, इस दावे के समर्थन में ठोस सार्वजनिक प्रमाण प्रस्तुत किए जाने की आवश्यकता है। ऐसे आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि के बिना उन्हें स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जा सकता।
घुसपैठ और राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा
रघुवर दास ने कहा कि ‘रिजिम चेंज’ की मांग करने वाली ताकतों के समर्थन और उनके उद्देश्यों पर सवाल उठाए जाने चाहिए। उन्होंने फ्रांस में हुए दंगों का उल्लेख करते हुए घुसपैठ और चरमपंथ से जुड़े मुद्दों पर चिंता जताई।उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा और लोकतांत्रिक संस्थाओं की रक्षा महत्वपूर्ण है। साथ ही, चुनावी प्रक्रिया को निष्पक्ष बनाए रखना और किसी भी पात्र मतदाता को मतदान के अधिकार से वंचित नहीं होने देना भी उतना ही जरूरी है।
एसआईआर और मतदाता सूची पर जोर
रघुवर दास ने शाहीन बाग आंदोलन और ‘वोट चोर’ जैसे नारों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने विभिन्न राजनीतिक चुनौतियों का सामना धैर्य और दूरदर्शिता के साथ किया है।उन्होंने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का समर्थन करते हुए इसे देश की संप्रभुता और मतदाता सूची की शुद्धता से जोड़ा। हालांकि, एसआईआर के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाने या जोड़ने की प्रक्रिया में पात्र मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा और प्रत्येक कार्रवाई की पारदर्शिता भी महत्वपूर्ण है।
लोकतंत्र में जवाबदेही जरूरी
रघुवर दास ने कहा कि ‘वोट चोर’ का नारा भी समय के साथ अपना प्रभाव खो देगा। उन्होंने केंद्र सरकार को जनकल्याणकारी बताते हुए कहा कि लोकतंत्र में सरकार और विपक्ष, दोनों की जवाबदेही जनता के प्रति है।उन्होंने अपने विचार के अंत में कहा कि भारत में सत्ता परिवर्तन का वैध रास्ता चुनाव है, न कि हिंसा या अराजकता। लोकतंत्र की वास्तविक ताकत संविधान, जनता के विश्वास और मतपत्र में निहित है।
— रघुवर दास
झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं ओडिशा के पूर्व राज्यपाल
