दिशोम गुरु शिबू सोरेन को आज मरणोपरांत मिलेगा पद्म भूषण, राष्ट्रपति के हाथों सम्मान ग्रहण करेंगी पत्नी रूपी सोरेन

नई दिल्ली/रांची: झारखंड आंदोलन के पुरोधा और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के संस्थापक नेता दिशोम गुरु शिबू सोरेन को आज देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म भूषण से मरणोपरांत सम्मानित किया जाएगा। नई दिल्ली में आयोजित पद्म पुरस्कार समारोह में उनकी पत्नी रूपी सोरेन राष्ट्रपति के हाथों यह सम्मान ग्रहण करेंगी। इस अवसर पर झामुमो विधायक और पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन भी समारोह में उपस्थित रहेंगी।

झारखंड आंदोलन के प्रमुख सूत्रधार थे शिबू सोरेन

शिबू सोरेन ने अलग झारखंड राज्य के गठन और आदिवासी समाज के अधिकारों की लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। अपने लंबे राजनीतिक और सामाजिक जीवन में उन्होंने जल, जंगल और जमीन से जुड़े मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से उठाया। इसी कारण उन्हें झारखंड की राजनीति में सम्मानपूर्वक “दिशोम गुरु” के नाम से जाना जाता है।उनके सामाजिक और राजनीतिक योगदान को देखते हुए केंद्र सरकार ने उन्हें मरणोपरांत पद्म भूषण से सम्मानित करने का निर्णय लिया था।

झारखंड में उत्साह का माहौल

पद्म भूषण सम्मान को लेकर झारखंड के राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में उत्साह का माहौल है। झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेताओं, कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने इसे पूरे राज्य के लिए गर्व का क्षण बताया है।पार्टी नेताओं का कहना है कि शिबू सोरेन का संघर्ष, त्याग और आदिवासी समाज के अधिकारों के प्रति समर्पण आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा प्रेरणास्रोत बना रहेगा।

झारखंड की अस्मिता को मिला राष्ट्रीय सम्मान

शिबू सोरेन को पद्म भूषण से सम्मानित किया जाना केवल उनके व्यक्तिगत योगदान का सम्मान नहीं, बल्कि झारखंड की अस्मिता, आदिवासी समाज के संघर्ष और राज्य निर्माण की लंबी लड़ाई को भी राष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान माना जा रहा है।यह सम्मान देश के उन महान नेताओं में शिबू सोरेन की पहचान को और मजबूत करेगा, जिन्होंने समाज और राष्ट्र निर्माण में उल्लेखनीय योगदान दिया।

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