जमशेदपुर में गीता थिएटर का नि:शुल्क समर कैंप, बच्चों को कला, फिटनेस और संस्कार से जोड़ने की पहल

जमशेदपुर: गीता थिएटर जमशेदपुर की ओर से शहर के दो अलग-अलग क्षेत्रों में नि:शुल्क समर कैंप का आयोजन किया जा रहा है। पहला समर कैंप 15 मई से 25 मई तक निम्नमध्यवर्गीय परिवारों के सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए जमशेदपुर वन प्रमंडल विभाग के सहयोग से मानगो वन विभाग सभागार में आयोजित किया गया। वहीं दूसरा कैंप 24 मई से 30 मई तक कुष्ठ परिवार के वंचित बच्चों के लिए साकची बाराद्वारी गांधी आश्रम के सामुदायिक भवन में चल रहा है।

बच्चों में दिखा उत्साह, फिटनेस और डांस के जरिए दी गई ट्रेनिंग

दोनों समर कैंप में बच्चों के बीच भारी उत्साह देखने को मिला। कैंप के दौरान शहर की सामाजिक संस्था संपूर्ण आश्रय जमशेदपुर की अध्यक्षा सुष्मिता सरकार ने शारीरिक व्यायाम प्रशिक्षक के रूप में भाग लिया।उन्होंने बच्चों को बॉलीवुड, नागपुरी, संबलपुरी और संथाली गीतों की धुन पर मनोरंजक तरीके से शारीरिक व्यायाम कराया। संगीत और फिटनेस के संयोजन ने बच्चों को बेहद आकर्षित किया और उन्होंने उत्साह के साथ भागीदारी निभाई।

बच्चों के बीच फल और पानी का वितरण

समर कैंप के दौरान संपूर्ण आश्रय की टीम ने बच्चों के बीच फल, खाद्य सामग्री और पानी की बोतलों का वितरण भी किया। संस्था की सामाजिक सेवा और निस्वार्थ योगदान को देखते हुए समर कैंप आयोजन समिति ने सुष्मिता सरकार को नि:शुल्क समर कैंप समिति का महिला उपाध्यक्ष घोषित किया है।

31 मई को होगा भव्य समापन समारोह

आयोजकों ने जानकारी दी कि 31 मई को आयोजित होने वाले भव्य समर कैंप समापन समारोह में संपूर्ण आश्रय जमशेदपुर को “दिशोम गुरु शिबू सोरेन झारखंड सर्वश्रेष्ठ सामाजिक सेवा संस्था सम्मान 2026” से सम्मानित किया जाएगा।

बच्चों को योग और स्वास्थ्य के प्रति किया जागरूक

कैंप में बच्चों को संबोधित करते हुए सुष्मिता सरकार ने स्वास्थ्य और योग के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि नियमित व्यायाम और योग से न केवल शरीर मजबूत होता है, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य भी बेहतर रहता है। उन्होंने बच्चों को दैनिक जीवन में योग अपनाने की सलाह दी।

बच्चों के सर्वांगीण विकास पर फोकस: प्रेम दीक्षित

प्रेम दीक्षित ने बताया कि समर कैंप का मुख्य उद्देश्य बच्चों के सर्वांगीण विकास को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि आज की व्यस्त जीवनशैली में बच्चे सामाजिक, नैतिक और सांस्कृतिक मूल्यों से दूर होते जा रहे हैं। ऐसे में रंगमंच और कला गतिविधियों के जरिए बच्चों को सकारात्मक दिशा देने और नशे जैसी बुराइयों से दूर रखने का प्रयास किया जा रहा है।

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