जमशेदपुर: लौहनगरी के हाईवे संचालकों ने साधारण खनिजों (जैसे बालू, गिट्टी, मिट्टी) के परिवहन में आ रही विसंगतियों को लेकर खनन विभाग को अल्टीमेटम दिया है। एसोसिएशन का कहना है कि स्पष्ट नियमों के अभाव में ट्रक मालिकों को बेवजह प्रशासनिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
कोर्ट के फैसलों का दिया हवाला
एसोसिएशन ने अपनी मांगों के समर्थन में सर्वोच्च न्यायालय के दो महत्वपूर्ण फैसलों का संदर्भ दिया।
माडा बनाम सेल (2024): इसके तहत खनिजों पर राज्य सरकार के अधिकारों और विकास प्राधिकरणों की भूमिका को स्पष्ट किया गया है।
दीपक कुमार बनाम हरियाणा राज्य: इस केस का हवाला देते हुए एसोसिएशन ने कहा कि बिल्डिंग स्टोन, बालू, मिट्टी और ग्रेवल जैसे साधारण खनिजों पर राज्य सरकार को स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार नियम बनाने का पूर्ण अधिकार है।
जीएसटी दस्तावेजों को वैधता देने की मांग
जब तक राज्य सरकार नई और स्पष्ट नियमावली नहीं बना लेती, तब तक एसोसिएशन ने एक वैकल्पिक व्यवस्था का सुझाव दिया है। साधारण पदार्थों के परिवहन और भंडारण को केवल जीएसटी दस्तावेजों के आधार पर ही वैध माना जाए। एसोसिएशन का तर्क है कि बिना स्पष्ट नीति के जिला प्रशासन द्वारा की जाने वाली कार्रवाई से लोगों के वैधानिक अधिकारों का हनन हो रहा है।
आंदोलन की चेतावनी
एसोसिएशन ने जिला प्रशासन से आग्रह किया है कि इस मांग पत्र को अविलंब राज्य सरकार तक भेजा जाए ताकि नीतिगत स्तर पर सुधार हो सके। हाईवे ओनर एसोसिएशन ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि उनकी मांगों पर विचार कर त्वरित कार्रवाई नहीं की गई, तो वे जोरदार आंदोलन करने को मजबूर होंगे, जिससे शहर की निर्माण गतिविधियों पर असर पड़ सकता है।
क्या है मुख्य समस्या?
वर्तमान में बालू और मिट्टी जैसे खनिजों के परिवहन के लिए चालान और अन्य विधिक दस्तावेजों को लेकर असमंजस की स्थिति बनी रहती है। ट्रक मालिकों का आरोप है कि नियमावली स्पष्ट न होने के कारण उन पर भारी जुर्माना लगाया जाता है, जबकि वे वैध तरीके से सामग्री का परिवहन कर रहे होते हैं।
