जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल की इमरजेंसी व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। रविवार देर रात सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल तीन युवकों को इलाज के लिए अस्पताल लाया गया, जहां कथित अव्यवस्था और कर्मचारियों की अनुपस्थिति के कारण परिजनों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। इस मामले को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता विजय सोय ने अस्पताल प्रबंधन और राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
सड़क हादसे में तीन युवक गंभीर रूप से घायल
जानकारी के अनुसार, रविवार रात करीब 10 बजे तुरियाबेड़ा निवासी गणेश पाल ने विजय सोय को सूचना दी कि बाइक दुर्घटना में हॉरेन भगत, सूरज पाल और दीपू साव गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। तीनों को तत्काल एमजीएम अस्पताल की इमरजेंसी में भर्ती कराया गया। सूचना मिलने पर विजय सोय अपने सहयोगियों के साथ अस्पताल पहुंचे।
सीटी स्कैन और एक्स-रे में हुई देरी का आरोप
विजय सोय का आरोप है कि तीनों घायलों के सिर, चेहरे और शरीर के अन्य हिस्सों से लगातार खून बह रहा था। प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें इमरजेंसी के बाहर फर्श पर लिटा दिया गया। जब मरीजों को सीटी स्कैन और एक्स-रे के लिए भेजा गया तो संबंधित कक्षों में कर्मचारी मौजूद नहीं थे। वहीं भुगतान काउंटर पर भी काफी देर तक कोई कर्मी नहीं मिलने से जांच प्रक्रिया प्रभावित हुई।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठाए सवाल
विजय सोय ने इस पूरे घटनाक्रम को स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर विफलता बताते हुए कहा कि इमरजेंसी सेवाओं में चौबीसों घंटे पर्याप्त चिकित्सकीय और तकनीकी स्टाफ की उपलब्धता सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने और अस्पताल की व्यवस्था में तत्काल सुधार लाने की मांग की है।
