जमशेदपुर: निजी स्कूलों की मनमानी के खिलाफ बारीडीह में ‘नुक्कड़ नाटक’ और ‘भिक्षाटन’; री-एडमिशन फीस बंद करने और समान सिलेबस की उठी मांग

जमशेदपुर: लौहनगरी के निजी विद्यालयों द्वारा बार-बार पाठ्यपुस्तकों में किए जा रहे बदलावों और लगातार बढ़ाई जा रही फीस से अभिभावकों की कमर टूट चुकी है। इस बढ़ते आर्थिक बोझ और शोषण के खिलाफ आज बारीडीह गोलचक्कर पर अभिभावकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान व्यवस्था पर तंज कसते हुए नुक्कड़ नाटक का मंचन किया गया और प्रतीकात्मक रूप से भिक्षाटन (भीख मांगकर विरोध) कर अपना आक्रोश दर्ज कराया गया।आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया है कि यदि सरकार और जिला प्रशासन ने इस पर अंकुश नहीं लगाया, तो यह आंदोलन आगे और उग्र रूप धारण करेगा।

“वन बोर्ड, वन बुक” व्यवस्था लागू करने की मांग

आंदोलन का नेतृत्व कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता बबूल झा और अन्य वक्ताओं ने शिक्षा व्यवस्था में बड़े सुधार की मांग उठाई। मांग की गई है कि सीबीएसई ,आईसीएसई और राज्य बोर्ड (जैक ) से संबद्ध सभी निजी विद्यालयों में संबंधित बोर्ड के अनुसार विषयवार समान पाठ्यपुस्तकों को अनिवार्य रूप से लागू किया जाए। वर्तमान व्यवस्था में एक ही बोर्ड के होने के बावजूद अलग-अलग स्कूल निजी प्रकाशकों से सांठगांठ कर हर साल किताबें बदल देते हैं। समान सिलेबस होने से अभिभावकों को हर वर्ष महंगी नई किताबें खरीदने की मजबूरी से राहत मिलेगी और छात्र पुरानी किताबों से भी पढ़ सकेंगे।

री-एडमिशन और बिल्डिंग फंड के नाम पर ‘लूट’ बंद हो

प्रदर्शनकारियों ने स्कूलों द्वारा लिए जाने वाले विभिन्न हिडन और अतिरिक्त शुल्कों पर तुरंत रोक लगाने की मांग की है। बबलू झा ने बताया कि निजी स्कूल हर साल बच्चों के अगली कक्षा में जाने पर री-एडमिशन शुल्क और बिल्डिंग फंड के नाम पर मोटी रकम वसूलते हैं। एक बार स्कूल में दाखिला होने के बाद हर साल री-एडमिशन के नाम पर पैसे लेना पूरी तरह अवैध और अनैतिक है। इन शुल्कों के कारण शिक्षा इतनी महंगी हो गई है कि मध्यमवर्गीय और निम्न आय वर्ग के परिवारों का बजट पूरी तरह बिगड़ गया है।

राज्य सरकार से स्पष्ट नीति और निगरानी तंत्र बनाने की गुहार

बारीडीह गोलचक्कर पर जुटे अभिभावकों ने झारखंड सरकार और शिक्षा विभाग से इस दिशा में तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की है। उनकी प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं जिसमे निजी स्कूलों की मनमानी फीस संरचना पुस्तक चयन प्रक्रिया को नियंत्रित करने के लिए राज्य स्तर पर एक स्पष्ट और कड़ा कानून बनाया जाए।जिला स्तर पर एक प्रभावी निगरानी तंत्र विकसित हो, जहां अभिभावक बिना किसी डर के स्कूलों की शिकायत कर सकें और तय समय में उन पर कार्रवाई सुनिश्चित हो।

नुक्कड़ नाटक के जरिए यह संदेश दिया गया कि कैसे एक आम आदमी अपने बच्चे को अच्छी शिक्षा देने के चक्कर में कर्ज के जाल में फंसता जा रहा है। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि आज का यह भिक्षाटन सरकार को जगाने के लिए है, और जब तक लिखित दिशा-निर्देश जारी नहीं होते, उनका यह आंदोलन थमेगा नहीं।

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