जमशेदपुर : एमजीएम अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले मरीजों और उनके परिजनों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। ताजा मामला एम्बुलेंस सेवा से जुड़ा है, जहाँ कार्यालय की व्यवस्था होने के बावजूद परिजनों को एम्बुलेंस के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है।
अधीक्षक की पहल पर फिरा पानी
नए अस्पताल की शुरुआत के बाद से ही एम्बुलेंस कर्मियों के लिए कोई निश्चित स्थान नहीं था, जिससे मरीजों को भारी परेशानी होती थी। पदभार संभालते ही अधीक्षक डॉ. बलराम झा ने संवेदनशीलता दिखाते हुए एम्बुलेंस कर्मियों के लिए एक समर्पित कार्यालय का निर्माण कराया। विडंबना यह है कि निर्माण के बाद से आज तक इस कार्यालय का ताला नहीं खुला। यहाँ न तो कोई कर्मी बैठता है और न ही परिजनों को कोई जानकारी देने वाला मौजूद रहता है।
कुर्सी-टेबल के बहाने अटकी सेवा
जब इस अव्यवस्था को लेकर एम्बुलेंस यूनिट के प्रभारी गौरी से बात की गई, तो उन्होंने अजीबोगरीब कारण गिनाए। प्रभारी का कहना है कि कार्यालय में बैठने के लिए अभी तक कुर्सी और टेबल की व्यवस्था नहीं हुई है। इसके अलावा कागजात रखने के लिए अलमारी या अन्य संसाधनों की कमी के कारण कर्मी वहाँ बैठने को तैयार नहीं हैं।
अधीक्षक का आश्वासन: “जल्द होंगी सुविधाएँ पूरी”
इस मामले पर अधीक्षक बलराम झा ने स्पष्ट किया कि प्रशासन की ओर से कमरे की व्यवस्था कर दी गई है। उन्होंने कहा कि जो तकनीकी या संसाधनों की कमी (कुर्सी-टेबल आदि) बताई जा रही है, उसे भी जल्द ही दूर कर लिया जाएगा ताकि कार्यालय सुचारू रूप से चल सके।
परिजनों की बढ़ी मुसीबत
अस्पताल प्रशासन और एम्बुलेंस यूनिट के बीच तालमेल की इस कमी का खामियाजा गरीब मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। एम्बुलेंस की जरूरत पड़ने पर परिजनों को पूरे अस्पताल परिसर में कर्मियों को ढूंढना पड़ता है। गंभीर स्थिति में एम्बुलेंस न मिलने या संपर्क न हो पाने के कारण इलाज में देरी हो रही है, जो मरीजों के लिए जानलेवा साबित हो सकती है।
